सीबीआई ने 1000 करोड़ रुपये के एचपीजेड टोकन घोटाले में दो चीनी नागरिकों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया
नोमान पारुल
- 10 Dec 2025, 05:00 PM
- Updated: 05:00 PM
नयी दिल्ली, 10 दिसंबर (भाषा) केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने एचपीजेड टोकन निवेश धोखाधड़ी ‘घोटाले’ के सिलसिले में दो चीनी नागरिकों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया है, जिसमें कोरोनाकाल के दौरान फर्जी कंपनियों के जरिये लोगों से 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी किए जाने का आरोप है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी।
सीबीआई ने आरोप लगाया है कि चीनी नागरिकों के स्वामित्व एवं नियंत्रण वाली कंपनी ‘शिगू टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड’ ने कोविड लॉकडाउन के दौरान ‘एचपीजेड टोकन’ नाम के एक फर्जी मोबाइल ऐप का इस्तेमाल करके लोगों के साथ ठगी की।
जांच एजेंसी ने कहा कि आरोपियों ने यह दावा करते हुए लोगों को निवेश के लिए प्रोत्साहित किया कि उक्त रकम का इस्तेमाल ‘क्रिप्टोकरेंसी माइनिंग’ में किया जाएगा, जिससे काफी उच्च रिटर्न हासिल होगा।
सीबीआई की जांच में पता चला कि यह कोई छुटपुट घटना नहीं थी, बल्कि विदेशी नागरिकों द्वारा संचालित एक बड़े, सुनियोजित साइबर अपराध गिरोह से जुड़ी हुई थी।
जांच एजेंसी ने पाया कि यह गिरोह कोविड-19 के बाद के दौर में भारतीय नागरिकों को निशाना बनाकर की गई कई साइबर धोखाधड़ी के लिए जिम्मेदार था, जिनमें कर्ज देने वाले ऐप, फर्जी निवेश ऐप और ऑनलाइन नौकरी की फर्जी पेशकश करने वाले मंचों का इस्तेमाल किया गया था।
अधिकारियों ने बताया कि वान जून और ली आनमिंग कंपनी स्थापित करने के लिए भारत आए थे, जिसके बाद वे देश छोड़कर चले गए और विदेश से ही कंपनी का संचालन करते रहे।
उन्होंने बताया कि दोनों ने कभी भी जांच में सहयोग नहीं किया और फरार रहे।
जब सीबीआई ने जांच अपने हाथ में ली, तो उसने तुरंत कार्रवाई करते हुए स्थानीय स्तर पर छह लोगों - डोर्त्से, रजनी कोहली, सुशांत बेहरा, अभिषेक, मोहम्मद इमदाद हुसैन और रजत जैन को गिरफ्तार किया।
जांच में एक विशाल और जटिल संचालन का खुलासा हुआ, जिसमें सभी 27 आरोपी बेनकाब हो गए। सीबीआई ने दो चीनी नागरिकों और 27 अन्य व्यक्तियों सहित 30 संस्थाओं के साथ-साथ तीन कंपनियों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया।
सीबीआई के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा, “वान जून ‘जिलियन कंसल्टेंट्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड’ नामक कंपनी का निदेशक था, जो एक चीनी कंपनी ‘जिलियन कंसल्टेंट्स’ की सहायक कंपनी थी। वान जून ने डोर्त्से की मदद से ‘शिगू टेक्नोलॉजीज’ सहित कई फर्जी कंपनियां बनाईं।”
सीबीआई की जांच में डिजिटल भुगतान मंचों के संगठित और परिष्कृत इस्तेमाल का भी खुलासा हुआ, जो उस समय भारत में अपने संचालन के शुरुआती चरण में थे।
भाषा
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