मंदिरों को जोड़ने वाले सर्किट से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने का लक्ष्य: तेलंगाना की मंत्री
यासिर पारुल
- 09 Dec 2025, 10:36 PM
- Updated: 10:36 PM
हैदराबाद, नौ दिसंबर (भाषा) तेलंगाना की मंत्री कोंडा सुरेखा ने मंगलवार को कहा कि महत्वपूर्ण मंदिरों को जोड़ने वाले चार प्रमुख सर्किट के जरिये धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देना राज्य सरकार का लक्ष्य है।
वन, पर्यावरण और धर्मस्व मंत्री सुरेखा ने यहां ‘तेलंगाना राइजिंग ग्लोबल समिट’ में कहा कि सुविधाओं में सुधार लाने, पर्यटन को बढ़ावा देने और आध्यात्मिक विरासत को संरक्षित करने के लिए ‘विजन 2047’ के तहत मास्टर प्लान तैयार किए जा रहे हैं।
एक आधिकारिक विज्ञप्ति में मंत्री के हवाले से कहा गया है, ‘‘सरकार का लक्ष्य चार प्रमुख सर्किट के माध्यम से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देना है, जो जोगुलाम्बा, मान्यमकोंडा, विकाराबाद अनंतगिरि, यादगिरिगुट्टा, रामप्पा, भद्राचलम, वेमुलावाड़ा, मेदाराम, कालेश्वरम और अन्य महत्वपूर्ण मंदिरों को जोड़ेंगे।’’
मंत्री ने पर्यटन नीति 2025-30 के अंतर्गत एक नये इको-पर्यटन ढांचे की घोषणा की, जो ‘कम संरचनाएं, अधिक अनुभव’ के सिद्धांत पर आधारित होगा और जिसकी नोडल एजेंसी तेलंगाना वन विकास निगम होगा।
सुरेखा ने कहा कि वर्तमान में राज्य में 13 इको-टूरिज्म सर्किट हैं और प्रकृति-आधारित पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक नये ब्रांड ‘डेक्कन वुड्स एंड ट्रेल्स’ की शुरुआत की गई है।
उन्होंने कहा कि अमराबाद बाघ अभ्यारण्य में अब 36 बाघ हैं, जो 2024 की तुलना में काफी अधिक हैं।
सुरेखा ने बताया कि पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए एक ऑनलाइन बुकिंग प्रणाली शुरू करने की योजना बनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि यह पहल राज्य के 2047 तक नेट-जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य के अनुरूप है।
सुरेखा ने कहा कि तेलंगाना में 19 प्रतिशत वन क्षेत्र है और सरकार वनों की सुरक्षा, हरित क्षेत्र के विस्तार तथा जलवायु चुनौतियों से निपटने के लिए प्रतिबद्ध है।
मंदिर प्रबंधन पर मंत्री ने कहा कि धर्मस्व विभाग 12 हजार से ज्यादा मंदिरों की देखरेख करता है। उन्होंने बताया कि 695 मंदिरों से आय होती है और 3,500 मंदिर भू-राजस्व पर चलते हैं।
मंत्री ने बताया कि धर्मस्व विभाग के सहयोग से सरकार 6,400 से ज्यादा ऐसे मंदिरों को सहायता प्रदान कर रही है, जिनके पास बुनियादी अनुष्ठानों के लिए भी संसाधन नहीं हैं।
भाषा
यासिर