सीबीआई ने 228 करोड़ रुपये के बैंक धोखाधड़ी मामले में अनिल अंबानी के बेटे पर मामला दर्ज किया
देवेंद्र पवनेश
- 09 Dec 2025, 06:16 PM
- Updated: 06:16 PM
नयी दिल्ली, नौ दिसंबर (भाषा) केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने उद्योगपति अनिल अंबानी के बेटे जय अनमोल अनिल अंबानी और ‘रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड’ (आरएचएफएल) के खिलाफ यूनियन बैंक ऑफ इंडिया से कथित 228 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी को लेकर मामला दर्ज किया है। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
अधिकारियों ने बताया कि जय अनमोल अनिल अंबानी के आवास पर सीबीआई ने तलाशी भी ली।
उन्होंने बताया कि सीबीआई ने बैंक (पूर्ववर्ती आंध्रा बैंक) की ओर से ‘रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड’, जय अनमोल अनिल अंबानी और रवींद्र शरद सुधाकर (दोनों आरएचएफएल के निदेशक) के खिलाफ शिकायत पर कार्रवाई की।
अंबानी के प्रवक्ता से इस मामले में प्रतिक्रिया जानने के लिए पूछे गए सवालों पर कोई जवाब नहीं मिला।
सीबीआई प्रवक्ता ने एक बयान में कहा, ‘‘जांच एजेंसी ने सीबीआई, मुंबई के विशेष न्यायाधीश की अदालत से तलाशी वारंट प्राप्त किया और ‘रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड’ के दो आधिकारिक परिसरों, ‘रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड’ के तत्कालीन निदेशक अनिल अंबानी के पुत्र जय अनमोल अंबानी के आवासीय परिसर और आरएचएफएल के पूर्व सीईओ और पूर्णकालिक निदेशक रवींद्र सुधाकर के आवासीय परिसरों में मंगलवार को तलाशी शुरू की।’’
अधिकारियों ने बताया कि सीबीआई की टीम आज सुबह मुंबई के कफ परेड स्थित अनिल अंबानी के आवास ‘सी विंड’ इमारत की सातवीं मंजिल पर पहुंचीं, जहां तलाशी के दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज कब्जे में लिये गये।
उन्होंने कहा कि ‘रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड’ ने 18 बैंकों, वित्तीय संस्थानों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया समेत कॉर्पोरेट निकायों से 5572.35 करोड़ रुपये का ऋण लिया था।
शिकायत में कहा गया है कि कंपनी ने व्यापारिक जरूरतों के लिए बैंक की मुंबई स्थित एससीएफ शाखा से 450 करोड़ रुपये का ऋण प्राप्त किया था।
इसमें कहा गया कि बैंक ने वित्तीय अनुशासन बनाए रखने की शर्त रखी थी, जिसमें समय पर पुनर्भुगतान, ब्याज और अन्य शुल्कों का भुगतान, समय पर प्रतिभूति की स्थिति और अन्य आवश्यक कागजात प्रस्तुत करना तथा बिक्री की पूरी राशि बैंक खाते के माध्यम से भेजना शामिल था।
अधिकारियों ने बताया कि कंपनी बैंक को किस्तों का भुगतान करने में विफल रही और इसलिए उक्त खाते को 30 सितंबर 2019 को गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) के रूप में वर्गीकृत कर दिया गया।
उन्होंने कहा कि ग्रांट थॉर्नटन (जीटी) द्वारा एक अप्रैल, 2016 से 30 जून, 2019 तक की समीक्षा अवधि के लिए खातों की फॉरेंसिक जांच की गई, जिससे पता चला कि उधार ली गई धनराशि का गलत बंटवारा किया गया था।
बैंक ने आरोप लगाया, ‘‘आरोपी व्यक्तियों ने उधारकर्ता कंपनी के पूर्व प्रवर्तकों/निदेशकों की हैसियत से खातों में हेराफेरी और आपराधिक विश्वासघात के माध्यम से धन का दुरुपयोग किया तथा जिस उद्देश्य के लिए वित्त प्रदान किया गया था, उसके अलावा अन्य उद्देश्यों के लिए धन का दुरुपयोग किया।’’
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