अदालत ने लाल किला विस्फोट मामले में समिति के गठन संबंधी याचिका पर विचार करने से इनकार किया
आशीष नरेश
- 03 Dec 2025, 05:22 PM
- Updated: 05:22 PM
नयी दिल्ली, तीन दिसंबर (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने लाल किले के पास विस्फोट मामले में मुकदमे के सभी चरण के लिए अदालत की निगरानी में समिति गठित करने के अनुरोध वाली याचिका पर विचार करने से बुधवार को इनकार कर दिया।
उच्च न्यायालय ने कहा कि मामले में मुकदमा अभी शुरू नहीं हुआ है और याचिका में उठाया गया मुद्दा केवल आशंका पर आधारित है और यह नहीं माना जा सकता कि मुकदमे में देरी होगी।
याचिकाकर्ता डॉ. पंकज पुष्कर ने मामले की दैनिक सुनवाई और जांच एजेंसी को अदालत द्वारा नियुक्त निगरानी समिति के समक्ष मासिक वस्तु स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने के लिए निर्देश देने का अनुरोध किया।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने कहा, ‘‘यह एक अच्छा लेख है, याचिका नहीं। आपको याचिका और शोध पत्र में अंतर समझना होगा। हम यहां आपके विचारों और सुझावों को सुनने के लिए नहीं बैठे हैं।’’
पीठ ने कहा, "हम यहां याचिका पर विचार करने के लिए बैठे हैं, जिसमें आप अपने किसी भी मौलिक अधिकार या संवैधानिक प्रावधान या किसी अन्य कानूनी रूप से लागू अधिकारों के उल्लंघन का जिक्र कर सकते हैं।"
कुछ दलीलों के बाद, याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत से उन्हें अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति देने का आग्रह किया। पीठ ने कहा, "कम से कम अदालत का समय तो बर्बाद न करें। हमें ऐसी स्थिति को समझना चाहिए जहां मामला वर्षों से लंबित है, लेकिन अभी तक सुनवाई शुरू नहीं हुई है।"
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि कम से कम मुकदमे की सुनवाई विधायी आदेश के अनुसार पूरी होनी चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। वकील ने कहा कि उन्हें अदालत से "कुछ आश्वासन" चाहिए कि मुकदमे में देरी नहीं होगी। उन्होंने विभिन्न आतंकवाद मामलों में देरी का हवाला दिया।
इस पर अदालत ने कहा कि मुकदमे का तभी निपटारा होगा जब यह शुरू होगा और अभी वह चरण नहीं आया है।
सुनवाई के दौरान, केंद्र का प्रतिनिधित्व कर रहे अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि याचिका गलत है और याचिकाकर्ता को यह भी पता नहीं है कि लाल किला विस्फोट मामला अब दिल्ली पुलिस के पास नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) को स्थानांतरित कर दिया गया है।
दस नवंबर को लाल किले के पास एक कार में विस्फोट हुआ था जिसमें 15 लोगों की जान चली गई थी।
याचिका में कहा गया है कि लाल किले के पास हमला कोई साधारण अपराध नहीं है - यह भारत की आत्मा पर, गणतंत्र की संप्रभुता के जीवंत प्रतीक पर हमला है, जहां राष्ट्र हर स्वतंत्रता दिवस पर अपनी संवैधानिक पहचान की पुष्टि करता है। इस आतंकवादी कृत्य की लक्षित प्रकृति राष्ट्रीय मनोबल को अस्थिर करने, व्यापक भय पैदा करने और गणतंत्र के अधिकार को कमजोर करने के लिए बनाई गई।
भाषा आशीष