कोच्चि में गुमशुदा व्यक्ति का शव पाया गया, बेटे ने अस्पताल पर लापरवाही का आरोप लगाया
नोमान पारुल
- 01 Dec 2025, 11:54 PM
- Updated: 11:54 PM
कोच्चि, एक दिसंबर (भाषा) बेंगलुरु निवासी सूरज लामा (59) का शव कोच्चि में एचएमटी परिसर के पास एक वन क्षेत्र में पाए जाने के बाद उनके बेटे सैंटन ने सोमवार को आरोप लगाया कि उनके पिता की मौत एर्नाकुलम सरकारी मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों की लापरवाही के कारण हुई।
सैंटन ने पत्रकारों से कहा कि यदि अस्पताल ने उनके पिता को छुट्टी न दी होती, तो उनकी मौत नहीं हुई होती। लामा स्मृति लोप की समस्या से पीड़ित थे।
कुवैत में रेस्तरां संचालित करने वाले लामा को कथित तौर पर मेथनॉल विषाक्तता के बाद याददाश्त संबंधी समस्या हुई थी और उन्हें अक्टूबर की शुरुआत में वहां से निर्वासित कर दिया गया था। वह पांच अक्टूबर को कोच्चि हवाई अड्डे पर पहुंचे और कलामसेरी स्थित एर्नाकुलम मेडिकल कॉलेज में भर्ती हुए।
हालांकि, 10 अक्टूबर को अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद वह लापता हो गए थे।
सैंटन ने केरल उच्च न्यायालय में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी। अदालत ने पुलिस को लापता लामा का पता लगाने के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने का निर्देश दिया था।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज से पता चला है कि लामा को आखिरी बार एचएमटी क्षेत्र के पास देखा गया था और तलाशी के दौरान एक क्षत-विक्षत लाश बरामद हुई।
उन्होंने बताया कि बरामद किए गए कपड़े उन कपड़ों से मेल खाते हैं, जिन्हें लामा को आखिरी बार पहने हुए देखा गया था।
सैंटन ने कहा, “मेरे भाई ने शव देखा - यह पहचान से परे है। मैंने फोटो देखी। हम उसकी पहचान नहीं कर सकते।” उन्होंने कहा कि वह डीएनए जांच के नतीजों का इंतजार करेंगे।
सैंटन ने अस्पताल पर उनके पिता को गैर-जिम्मेदाराना तरीके से छुट्टी देने का आरोप लगाया।
उन्होंने सवाल किया, “मेरे पास कुवैत सरकार का एक मेडिकल प्रमाणपत्र है, जिसमें लिखा है कि मेरे पिता मानसिक रूप अस्वस्थ हैं। अस्पताल कैसे कह सकता है कि उन्होंने छुट्टी मांगी थी? अस्पताल ने उन्हें उस हालत में कैसे जाने दिया?”
सैंटन ने बताया कि शव को आगे की औपचारिकताओं के लिए उसी मेडिकल कॉलेज ले जाया गया है।
सैंटन ने कहा कि वह डीएनए जांच में पुष्टि का इंतजार करेंगे और उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर मामले को दूसरी जगह स्थानांतरित करने का अनुरोध करेंगे।
मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों ने कहा कि आरोपों की जांच की जाएगी और भर्ती किए जाने तथा छुट्टी दिए जाने से जुड़े सभी रिकॉर्ड का सत्यापन किया जाएगा।
इस बीच, केरल उच्च न्यायालय ने बरामद शव के संबंध में पुलिस से रिपोर्ट मांगी है।
न्यायमूर्ति देवन रामचंद्रन और न्यायमूर्ति एमबी स्नेहलता की खंडपीठ ने कहा कि यह “परेशान करने वाली खबर” है कि एक क्षत-विक्षत लाश मिली है।
अदालत ने कहा, “इस समय हम केवल यही आशा और प्रार्थना कर सकते हैं कि जो शव मिला है वह 'कथित बंदी' का न हो।”
अदालत ने कहा कि उसे यह जानना है कि लामा मेडिकल कॉलेज में कैसे आए और उन्हें कैसे छुट्टी दी गई।
याचिका पर चार दिसंबर को फिर से सुनवाई की जाएगी।
भाषा
नोमान