महाराष्ट्र: मेडिकाबाजार ‘धोखाधड़ी’ मामले में अदालत ने दो आरोपियों को अग्रिम जमानत दी
जितेंद्र माधव
- 19 Nov 2025, 09:01 PM
- Updated: 09:01 PM
मुंबई, 19 नवंबर (भाषा) मुंबई की एक अदालत ने पुलिस को 264 करोड़ रुपये के मेडिकाबाजार ‘कॉर्पोरेट धोखाधड़ी’ मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार न करने का निर्देश दिया।
अदालत ने मंगलवार को आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह राहत प्रदान की।
मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) मेडिकाबाजार की मूल कंपनी ‘बोस्टन आइवी हेल्थकेयर सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड’ से जुड़े 264 करोड़ रुपये के कथित कॉर्पोरेट धोखाधड़ी की जांच कर रही है।
सह-संस्थापक और पूर्व सीईओ विवेक तिवारी ने शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें उन्होंने कंपनी के वर्तमान प्रबंधन और विदेशी निवेशक साझेदारों पर बड़े पैमाने पर वित्तीय कदाचार व उन्हें जबरन हटाने के प्रयास करने का आरोप लगाया था, जिसके बाद मामले की जांच शुरू की गयी।
शुरू में एमआईडीसी थाने में शिकायत दर्ज की गई थी, जिसे बाद में कॉर्पोरेट धोखाधड़ी प्रकोष्ठ को हस्तांतरित कर दिया।
प्राथमिकी में बोर्ड के कई सदस्यों और निवेशक प्रतिनिधियों के नाम शामिल हैं। शिकायत के अनुसार, कथित अपराध 2024 और 2025 में हुए, जब दोनों संस्थापकों तिवारी और केतन मलकान को अचानक उनके प्रबंधकीय पदों से हटा दिया गया।
शिकायतकर्ता ने प्रबंधन पर जनवरी 2025 में बिना उचित मंजूरी के एक ट्रस्ट बनाने का आरोप लगाया, जिसके बाद कंपनी ने ट्रस्ट को बहुत कम मूल्य पर शेयर खरीदने के लिए 15 करोड़ रुपये का ऋण दिया।
इससे प्रत्येक संस्थापक की हिस्सेदारी कथित तौर पर लगभग 13 प्रतिशत कम हो गई।
प्रबंधन पर 264 करोड़ रुपये से अधिक की राशि को फर्जी कंपनियों या अस्तित्वहीन संस्थाओं में अंतरित करने का भी आरोप है।
गिरफ्तारी के डर से बोर्ड के दो सदस्यों रविशंकर गोपालकृष्णन और पिनाक अशोक श्रीखंडे ने अग्रिम जमानत का अनुरोध किया था।
आरोपियों की ओर से उनके वकील अमित देसाई और प्रमोद दुबे ने मंगलवार को इस आधार पर अंतरिम राहत का अनुरोध किया कि उन्होंने जांच में सहयोग किया है। जांच अधिकारी ने उनकी दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि वे (आरोपी) प्रासंगिक जानकारी नहीं दे रहे हैं।
अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद जांच अधिकारी को निर्देश दिया कि वह आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी जैसी कोई भी दंडात्मक कार्रवाई न करें।
अदालत ने कहा कि आरोपियों को अपने पासपोर्ट पुलिस को सौंपने होंगे और एक दिसंबर को होने वाली अगली सुनवाई तक प्रतिदिन आर्थिक अपराध शाखा कार्यालय में उपस्थित होना होगा।
भाषा जितेंद्र