आईआईटी-मद्रास और आईआरएफसी ने भारत की पहली एससीओटी अनुसंधान प्रयोगशाला स्थापित की
संतोष प्रशांत
- 17 Nov 2025, 08:17 PM
- Updated: 08:17 PM
नयी दिल्ली, 17 नवंबर (भाषा) मद्रास स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी-मद्रास) और भारतीय रेलवे वित्त निगम (आईआरएफसी) ने देश की पहली ‘सिंगल सेल ओमिक्स ट्रांसलेशनल’ (एससीओटी) अनुसंधान प्रयोगशाला स्थापित की है। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि अत्याधुनिक उपकरणों से सुसज्जित, एससीओटी प्रयोगशाला कैंसर, हृदय रोग, संक्रमण, सूजन, चयापचय और अन्य गैर-संचारी रोगों सहित विभिन्न रोगों के शीघ्र निदान, रोग निदान, बायोमार्कर खोज और दवा जांच की सुविधा प्रदान करेगी।
आईआरएफसी इस प्रयोगशाला की स्थापना के लिए 10.83 करोड़ रुपये का सीएसआर अनुदान प्रदान कर रहा है, जो आईआईटी-मद्रास के चिकित्सा विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएमएसटी) में स्थित होगी।
यह सुविधा एकल-कोशिकीय जीव विज्ञान, दवा खोज, बायोमार्कर पहचान और ट्रांसलेशनल स्वास्थ्य सेवा नवाचार में अनुसंधान को गति देने के लिए तैयार की गई है।
आईआईटी-मद्रास के निदेशक वी. कामकोटि ने कहा, ‘‘आईआरएफसी के साथ हमारा सहयोग औषधि खोज और सटीक चिकित्सा के क्षेत्र में भारत की यात्रा को गति देने में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। अत्याधुनिक एससीओटी अनुसंधान प्रयोगशाला प्रारंभिक निदान, लक्षित चिकित्सा और अगली पीढ़ी के स्वास्थ्य सेवा नवाचार में भारत की क्षमताओं के अनुरूप समाधान विकसित करने की हमारी क्षमता को बहुत बढ़ाएगी।’’
प्रयोगशाला से उच्च-प्रभावी परिणामों की आशा करते हुए रेल मंत्रालय की सदस्य (वित्त) उषा वेणुगोपाल ने कहा कि एससीओटी अनुसंधान प्रयोगशाला का उद्घाटन चिकित्सा अनुसंधान में मजबूत क्षमताओं के निर्माण की दिशा में एक स्वागत योग्य कदम है।
‘आईआरएफसी’ की सीएसआर निधि के माध्यम से प्रदान की गई सहायता उन अध्ययनों में सहायक होगी जिनमें शीघ्र निदान में सुधार करने और बेहतर उपचार विकसित करने की क्षमता है।
वेणुगोपाल ने कहा, ‘‘यह सहयोग दर्शाता है कि कैसे संस्थान बड़े राष्ट्रीय लक्ष्यों के लिए मिलकर काम कर सकते हैं। मुझे आशा है कि यह सुविधा आने वाले वर्षों में ज्ञान, नवाचार और बेहतर स्वास्थ्य परिणामों में योगदान देगी।’’
आईआईटी-मद्रास के चिकित्सा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की अनुबामा राजन ने कहा कि भारत को ऐसे अनुसंधान मंचों की आवश्यकता है जो आणविक अंतर्दृष्टि को सीधे नैदानिक प्रभाव से जोड़ सकें।
भाषा संतोष