न्यायालय ने लंबित आवासीय परियोजना की जांच के आदेश दिए, समिति का गठन किया
वैभव माधव
- 07 Nov 2025, 09:14 PM
- Updated: 09:14 PM
नयी दिल्ली, सात नवंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में एक रुकी हुई आवासीय परियोजना को पूरा करने के लिए व्यापक जांच करने और व्यावहारिक रोडमैप सुझाने के वास्ते इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश पंकज नकवी की अध्यक्षता में एक सदस्यीय समिति का गठन किया।
अदालत के इस फैसले में, गोल्फ कोर्स सहकारी आवास समिति (पूर्व में जेपी ग्रीन्स कर्मचारी सहकारी आवास समिति) और ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण (जीएनआईडीए) से जुड़े लंबे समय से लंबित आवासीय परियोजना को लेकर विवाद की स्वतंत्र जांच का निर्देश दिया गया है।
इस विवाद ने लगभग दो दशक से अपने फ्लैटों पर कब्जे का इंतजार कर रहे सैकड़ों घर खरीदारों को प्रभावित किया है।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने कहा, ‘‘तथ्य और परिस्थितियां स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं कि अपने सिर पर छत का सपना देखने वाले मूल आवंटी पिछले लगभग 20 वर्षों से संघर्ष कर रहे हैं।’’
उसने कहा, ‘‘यह स्पष्ट है कि याचिकाकर्ताओं/आवेदकों/आवंटियों ने अपनी मेहनत की कमाई गंवाने के अलावा, इस समय में भारी कष्ट सहे हैं और प्रशासनिक गतिरोध और लंबी मुकदमेबाजी में उलझे रहे हैं।’’
न्यायमूर्ति मेहता ने 51 पृष्ठों का फैसला लिखते हुए कहा कि विभिन्न मंचों पर उपाय करने के बावजूद, घर खरीदारों की शिकायतों का समाधान नहीं हुआ है।
इसमें आगे कहा गया है कि शीघ्र और प्रभावी समाधान के लिए, एक पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र समिति का गठन अनिवार्य हो गया है।
इसमें कहा गया है, ‘‘इसलिए, हम इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एक पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक सदस्यीय समिति बनाने के इच्छुक हैं, जो संपूर्ण तथ्यात्मक ढांचे की विस्तृत जांच करेगी और एक उपयुक्त समाधान के लिए सुझाव देगी।’’
समिति को अपना कार्य शुरू करने के चार महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट न्यायालय को सौंपने का निर्देश दिया गया है।
उत्तर प्रदेश सरकार, जीएनआईडीए, उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद के आवास आयुक्त, जिला मजिस्ट्रेट और सभी संबंधित बैंकों को समिति के साथ सहयोग करने का आदेश दिया गया है।
भाषा वैभव