पोप लियो ने अमेरिका में हिरासत में लिये गए प्रवासियों के साथ व्यवहार पर 'गहन चिंतन' का आह्वान किया
एपी प्रशांत सुरेश
- 05 Nov 2025, 06:19 PM
- Updated: 06:19 PM
वेटिकन सिटी, पांच नवंबर (एपी) पोप लियो चौदहवें ने अमेरिका में हिरासत में रखे गए प्रवासियों के साथ किए जा रहे बर्ताव पर “गंभीर आत्मचिंतन” की अपील की है।
उन्होंने कहा, ‘‘कई ऐसे लोग, जो वर्षों से वहां रह रहे हैं और जिन्होंने कभी कोई समस्या उत्पन्न नहीं की, वे इस समय वहां के घटनाक्रमों से बहुत प्रभावित हुए हैं।”
शिकागो में जन्मे पोप मंगलवार को कास्टेल गंडोल्फो में पोप रिट्रीट के बाहर संवाददाताओं द्वारा पूछे गए विभिन्न भू-राजनीतिक प्रश्नों का उत्तर दे रहे थे। इन प्रश्नों में अमेरिकी हिरासत में प्रवासियों को किस प्रकार के आध्यात्मिक अधिकार मिलने चाहिए, वेनेजुएला के तट पर संदिग्ध मादक पदार्थ तस्करों पर अमेरिकी सैन्य हमले तथा पश्चिम एशिया में नाजुक युद्ध विराम जैसे प्रश्न भी शामिल थे।
लियो ने इस बात पर जोर दिया कि पवित्र शास्त्र उस प्रश्न को महत्व देता है जो दुनिया के अंत में पूछा जाएगा: ‘‘तुमने अजनबी का कैसे स्वागत किया? क्या तुमने उसे अपनाया और स्वागत किया या नहीं?’’ उन्होंने कहा कि वर्तमान में जो कुछ भी हो रहा है, उस पर गंभीर और गहरे चिंतन की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि हिरासत में लिये गए लोगों के आध्यात्मिक अधिकारों पर भी विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि वे पादरी कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिये गए प्रवासियों तक पहुंचने की अनुमति दें।
लियो ने कहा, ‘‘कई बार उन्हें अपने परिवारों से अलग होना पड़ा है। कोई नहीं जानता कि क्या हो रहा है, लेकिन उनकी आध्यात्मिक जरूरतों का ध्यान रखा जाना चाहिए।’’
पिछले महीने, यूनियन ने शिकागो से आए श्रमिक संघ नेताओं से प्रवासियों के पक्ष में वकालत करने तथा अल्पसंख्यकों का अपने संगठन में स्वागत करने का आग्रह किया था।
वेनेजुएला के तट पर संदिग्ध मादक पदार्थ तस्करों पर घातक हमलों के बारे में पूछे जाने पर पोप ने कहा कि सैन्य कार्रवाई से “तनाव बढ़ रहा है” तथा उन्होंने कहा कि वे समुद्र तट के और भी करीब आ रहे हैं।
पोप ने कहा, “जरूरत बातचीत की है।”
लियो ने स्वीकार किया कि पश्चिम एशिया में इजराइल और हमास के बीच शांति समझौते का पहला चरण “बहुत नाजुक” बना हुआ है। उन्होंने कहा कि पक्षों को भविष्य के शासन के लिए आगे बढ़ने का रास्ता खोजने और सभी लोगों के अधिकारों की गारंटी देने की आवश्यकता है।
एपी प्रशांत