फिर गाजा छोड़कर जाने को मजबूर हुए फलस्तीनी परिवार की निराशा बढ़ी
एपी पारुल नरेश
- 18 Sep 2025, 03:35 PM
- Updated: 03:35 PM
खान यूनिस, 18 सितंबर (एपी) नेमान अबू जराद और उनके परिवार के सदस्यों पर थकान, निराशा और गुस्सा हावी होता जा रहा है। और हो भी क्यों न, गाजा पट्टी में हिंसा के चलते उन्हें 11वीं बार अपना बसा-बसाया घर-बार छोड़ने के लिए मजबूर जो होना पड़ा है।
नेमान कहते हैं, “हम फिर से यातना के दौर में लौट गए हैं। हम बार-बार विस्थापित नहीं हो रहे हैं, हम घुट-घुटकर मर रहे हैं।”
इजराइल की बढ़ती बमबारी और जमीनी कार्रवाई शुरू करने की तैयारियों के बीच नेमान का परिवार पिछले हफ्ते अपनी कीमती वस्तुएं लेकर गाजा शहर से दक्षिण में खान यूनिस चला गया।
खान यूनिस में परिवार एक बंजर भूमि पर तंबू लगाकर रहने लगा है। हालांकि, परिवार को पता नहीं है कि आने वाले दिनों में उसे खाना-पानी नसीब हो पाएगा भी या नहीं।
सात अक्टूबर 2023 को इजराइल पर हमास के हमले के बाद दोनों पक्षों में छिड़ी लड़ाई के चलते उत्तरी गाजा में अपना पुश्तैनी घर छोड़ने के लिए मजबूर हुआ नेमान का परिवार लगभग दो साल से विस्थापन का दंश झेल रहा है।
इजराइल के लगातार अलग-अलग क्षेत्रों को निशाना बनाने के कारण नेमान के परिवार के पास अन्य लाखों फलस्तीनी परिवारों की तरह समय-समय पर अपना ठिकाना बदलने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।
नेमान के मुताबिक, जनवरी में इजराइल और हमास के बीच हुए अस्थाई युद्ध-विराम के दौरान उसका परिवार उत्तर गाजा में अपने घर लौटा था, जो इजराइली हमलों के कारण क्षतिग्रस्त हो गया था, लेकिन अपनी जगह पर खड़ा था। हालांकि, दो महीने के भीतर इजराइल ने फिर से हमले शुरू कर दिए, जिससे परिवार को दूसरा ठिकाना तलाशना पड़ा।
नेमान के परिवार में उसकी पत्नी माजिदा, छह बेटियां और दो साल की नातिन है। वह हर बार इस उम्मीद में नये इलाके में जाकर रहने लगते हैं कि जीवन में कुछ पल के लिए ठहराव आएगा। लेकिन उन्हें हर बार दुख और निराशा का सामना करना पड़ता है।
नेमान के अनुसार, युद्ध का कोई अंत नजर नहीं आ रहा है और उन्हें डर है कि हालात और बदतर हो सकते हैं। वह कहते हैं, “आने वाला समय और अंधकारमय है। हमें (गाजा पट्टी से) निकाला जा सकता है। हम मर भी सकते हैं... आपको पल-पल ऐसा लगता है, मानो मौत आपको घेर रही है। हम बस मौत से बचने के लिए एक जगह से दूसरी जगह भागते फिर रहे हैं।”
एपी पारुल