मध्यम आय वाले देशों में 1990-2021 के दौरान ‘मस्कुलोस्केलेटल विकार’ में सबसे अधिक वृद्धि: अध्ययन
शफीक पवनेश
- 16 Sep 2025, 04:42 PM
- Updated: 04:42 PM
नयी दिल्ली, 16 सितंबर (भाषा) दुनिया के एक तिहाई देशों में 1990-2021 के दौरान गठिया और ऑस्टियोपोरोसिस जैसे ‘मस्कुलोस्केलेटल विकारों’ में वृद्धि का सबसे बड़ा कारण बढ़ती उम्र हो सकती है। मध्यम आय वाले देशों में ‘मस्कुलोस्केलेटल विकारों’ में सबसे अधिक वृद्धि देखी जा रही है। एक नये अध्ययन में यह बात सामने आई है।
‘मस्कुलोस्केलेटल विकार’ ऐसी स्थितियां हैं जो मांसपेशियों, हड्डियों, जोड़ों और संयोजी ऊतकों को प्रभावित करती हैं। ये विकार जन्म से ही मौजूद हो सकते हैं अथवा चोट या बीमारी के परिणामस्वरूप विकसित हो सकते हैं।
अध्ययनकर्ताओं ने कहा कि उच्च आय वाले देशों की तुलना में युवा आबादी होने के बावजूद, मध्यम आय वाले देशों में वृद्ध आबादी के कारण मस्कुलोस्केलेटल विकारों से प्रभावित लोगों की संख्या सबसे ज्यादा है।
चीन के अनहुई चिकित्सा विश्वविद्यालय के ‘स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ’ के प्रमुख अध्ययनकर्ता हाई-फेंग पैन ने कहा कि मध्यम आय वाले देशों में ‘‘प्रतिक्रिया देने के लिए अक्सर स्वास्थ्य सेवा प्रणालियां सबसे कम तैयार होती हैं।’’
शोधकर्ताओं ने कहा कि पत्रिका ‘एनल्स ऑफ द रूमेटिक डिजीज’ में प्रकाशित ये निष्कर्ष तेजी से हो रहे जनसांख्यिकीय बदलाव और वृद्ध वयस्कों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए स्वास्थ्य प्रणाली की सीमित तैयारी को दर्शाते हैं।
दुनिया भर में विशेषकर उच्च और उच्च-मध्यम आय वाले देशों में, पुरुषों में जनसंख्या के बूढ़े होने का अधिक प्रभाव देखा गया, जबकि महिलाएं निम्न से मध्यम आय वाले देशों में अधिक प्रभावित पाई गईं।
अध्ययन के मुताबिक, ऑस्टियोआर्थराइटिस - जो जोड़ों को प्रभावित करता है - दुनिया भर में सबसे अधिक लोगों को प्रभावित करने वाला ‘मस्कुलोस्केलेटल विकार’ था, इसके बाद विभिन्न प्रकार के गठिया का स्थान था।
हाई-फेंग ने कहा, ‘‘बूढ़ी होती आबादी एक अपरिहार्य वैश्विक प्रवृत्ति है, लेकिन मस्कुलोस्केलेटल विकारों पर इसका प्रभाव हर जगह एक जैसा नहीं है। हमारा अध्ययन दर्शाता है कि मध्यम आय वाले देशों में ‘मस्कुलोस्केलेटल विकार’ में सबसे अधिक वृद्धि देखी गई, फिर भी अक्सर ऐसे देशों की स्वास्थ्य सेवा प्रणालियां प्रतिक्रिया देने के लिए सबसे कम तैयार होती हैं।’’
उन्होंने कहा कि यह अध्ययन नीति निर्माताओं के लिए काफी अहम हो सकता है।
भाषा
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