रेवंत रेड्डी के खिलाफ मानहानि मामला रद्द करने संबंधी आदेश को न्यायालय में चुनौती
सुभाष नरेश
- 05 Sep 2025, 05:21 PM
- Updated: 05:21 PM
नयी दिल्ली, पांच सितंबर (भाषा) भाजपा की तेलंगाना इकाई ने उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती देते हुए उच्चतम न्यायालय का रुख किया है, जिसमें 2024 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी द्वारा दिये गए भाषण को लेकर उनके खिलाफ मानहानि का मामला रद्द कर दिया गया था।
यह याचिका 8 सितंबर को प्रधान न्यायाधीश बी आर गवई, न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन और न्यायमूर्ति अतुल एस चंदुरकर की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आएगी।
तेलंगाना उच्च न्यायालय ने एक अगस्त को रेड्डी की याचिका पर आदेश सुनाया, जिसमें हैदराबाद की एक अधीनस्थ अदालत में लंबित मामले की कार्यवाही रद्द करने का अनुरोध किया गया था।
भाजपा की तेलंगाना इकाई ने मई 2024 में रेड्डी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उन्होंने पिछले साल 4 मई को पार्टी के खिलाफ अपमानजनक और भड़काऊ भाषण दिया था।
शिकायत में आरोप लगाया गया था कि रेड्डी ने कांग्रेस की तेलंगाना इकाई के साथ मिलकर यह फर्जी राजनीतिक विमर्श गढ़ा था कि अगर भाजपा सत्ता में आई तो वह आरक्षण खत्म कर देगी।
शिकायतकर्ता ने दावा किया कि कथित मानहानिकारक भाषण ने एक राजनीतिक दल के रूप में भाजपा की प्रतिष्ठा को धूमिल किया है।
पिछले साल अगस्त में एक अधीनस्थ अदालत ने कहा था कि रेड्डी के खिलाफ तत्कालीन भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 125 के तहत मानहानि के कथित अपराधों के लिए प्रथम दृष्टया मामला बनता है।
अधिनियम की धारा 125 चुनाव के संबंध में विभिन्न वर्गों के बीच वैमनस्य को बढ़ावा देने से संबंधित है।
अधीनस्थ अदालत के आदेश को चुनौती देते हुए, रेड्डी ने उच्च न्यायालय का रुख किया था और दलील दी कि शिकायत में लगाए गए आरोप उनके खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला नहीं बनाते हैं।
रेड्डी ने उच्च न्यायालय में दलील दी कि राजनीतिक भाषणों को मानहानि का विषय नहीं बनाया जा सकता।
उच्च न्यायालय ने कहा था, ‘‘राजनीतिक भाषणों को अक्सर बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है। यह आरोप लगाना कि ऐसे भाषण मानहानिकारक हैं, एक और अतिशयोक्ति है।’’
रेड्डी की याचिका स्वीकार करते हुए, उच्च न्यायालय ने अधीनस्थ अदालत के आदेश और मामले से संबंधित कार्यवाही को रद्द कर दिया था।
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