7/11 ट्रेन विस्फोट: मृत आरोपी को दोषमुक्त करार दिए जाने का आदेश उसकी कब्र पर पढ़ा गया
सिम्मी वैभव
- 01 Sep 2025, 10:31 AM
- Updated: 10:31 AM
नागपुर, एक सितंबर (भाषा) मुंबई में 2006 में हुए ट्रेन विस्फोट मामले में 16 साल जेल में रहे मृत आरोपी कमाल अहमद वकील अहमद अंसारी के परिवार के सदस्यों ने उसे बरी किए जाने का मुंबई उच्च न्यायालय का आदेश उसकी कब्र पर जाकर पढ़ा।
अंसारी के परिवार और समुदाय के सदस्य रविवार को यहां उसकी कब्र पर गए। उन्होंने मामले में जवाबदेही सुनिश्चित किए जाने की मांग करते हुए कहा कि अंसारी पर विस्फोटों में शामिल होने का झूठा आरोप लगाया गया था।
मुंबई में सात ट्रेन विस्फोट में 180 से अधिक लोगों की मौत के 19 साल बाद उच्च न्यायालय ने अंसारी समेत सभी 12 आरोपियों को पिछले महीने बरी कर दिया था। अदालत ने कहा था कि अभियोजन पक्ष मामले को साबित करने में ‘‘पूरी तरह विफल’’ रहा और ‘‘यह विश्वास करना मुश्किल है कि आरोपियों ने अपराध किया है।’’
अंसारी की 2021 में कोरोना वायरस महामारी के दौरान नागपुर की एक जेल में मौत हो गई थी। उसे शहर के जरीपटका मुस्लिम कब्रिस्तान में दफनाया गया था।
‘इनोसेंस नेटवर्क’ के महासचिव डॉ. अब्दुल वाहिद शेख, जमीयत-ए-उलेमा नागपुर के अध्यक्ष कारी साबिर और अंसारी के छोटे भाई समेत कई लोग रविवार को अंसारी की कब्र पर गए।
शेख ने बताया कि उन्होंने अंसारी की कब्र पर 21 जुलाई के उच्च न्यायालय के फैसले के पैरा 1,486 को जोर से पढ़ा जिससे उसकी इस बात की पुष्टि सार्वजनिक रूप से हुई जो वह हमेशा कहता रहा-कि वह निर्दोष था।
शेख ने कहा, ‘‘अंसारी बिहार के मधुबनी का मूल निवासी था। वह आजीविका के लिए मुर्गी की एक छोटी सी दुकान चलाता था, सब्जियां बेचता था और अपने पांच बच्चों एवं पत्नी के भरण-पोषण के लिए अथक परिश्रम करता था लेकिन उसकी साधारण जिंदगी तब बिखर गई जब महाराष्ट्र एटीएस (आतंकवाद-रोधी दस्ते) ने उस पर झूठा आरोप लगाया और उसे आतंकवादी करार दे दिया।’’
शेख ने कहा, ‘‘वह 16 साल जेल में रहा, उसकी गरिमा छीन ली गई, उसके परिवार को कलंकित किया गया और उसकी दलीलों को अनसुना कर दिया गया।’’
उन्होंने कहा कि अंसारी की मौत के चार साल बाद उसका बरी होना एक ‘‘खोखली जीत’’ है।
शेख ने कहा, ‘‘अंसारी की कहानी अकेली नहीं है, बल्कि यह इस बात की भयावह याद दिलाती है कि कैसे अनगिनत निर्दोष लोगों को आतंकवादी करार दिया जाता है, दशकों तक जेल में बंद रखा जाता है और कभी-कभी न्याय मिलने से पहले ही वे जेल में मर जाते हैं।’’
भाषा
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