हत्या के प्रयास के आरोपों से आरोपियों को बरी करने के खिलाफ खालिद की याचिका पर पुलिस को नोटिस
प्रशांत सुरेश
- 13 Mar 2024, 08:00 PM
- Updated: 08:00 PM
नयी दिल्ली, 13 मार्च (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को एक याचिका पर पुलिस और उन दो लोगों से जवाब तलब किया है, जिन्होंने 2018 में यहां कंस्टीट्यूशन क्लब के बाहर कार्यकर्ता उमर खालिद पर कथित तौर पर गोलियां चलाई थीं।
उमर खालिद ने दोनों को हत्या के प्रयास के आरोप से मुक्त करने के अधीनस्थ अदालत के आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी है।
दोनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 201 (साक्ष्य नष्ट करना), 34 (सामान्य इरादे को आगे बढ़ाने में कई व्यक्तियों द्वारा किए गए कार्य) और शस्त्र अधिनियम की धारा 25 एवं 27 (प्रतिबंधित हथियार और गोला-बारूद रखना) के तहत दंडनीय अपराध के लिए आरोप तय किए गए थे। इनकी सुनवाई मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा की जाती है।
न्यायमूर्ति अनूप कुमार मेंदीरत्ता ने पटियाला हाउस अदालत के एक अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश द्वारा पारित छह दिसंबर, 2023 के आदेश को चुनौती देने वाली जेएनयू के पूर्व छात्र खालिद की याचिका पर पुलिस एवं दो आरोपियों, दरवेश और नवीन दलाल को नोटिस जारी किए।
अदालत ने इस मामले में सुनवाई की अगली तारीख 21 मई को तय की है।
खालिद पर हमला तब किया गया जब वह 13 अगस्त, 2018 को कंस्टीट्यूशन क्लब में आयोजित होने वाले एक कार्यक्रम ‘खौफ से आजादी’ में हिस्सा लेने जा रहा था।
दोनों आरोपियों को 20 अगस्त, 2018 को हरियाणा के हिसार जिले के फतेहाबाद से गिरफ्तार किया गया था। घटना के संबंध में पुलिस ने हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया था।
हत्या के प्रयास के अपराध से दोनों को बरी करते हुए अधीनस्थ अदालत ने कहा था कि आरोपी दलाल ने केवल पीड़ित या शिकायतकर्ता की ओर पिस्तौल तानी थी, लेकिन कोई गोली नहीं चलाई थी।
उसने कहा था कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई आरोप या सामग्री नहीं है जो यह साबित कर सके कि आरोपी ने ट्रिगर दबाया या ट्रिगर दबाने का प्रयास किया था।
अदालत ने कहा, ‘‘रिकॉर्ड में मौजूद बयान और सामग्री से आरोपी द्वारा शिकायतकर्ता/पीड़ित की मौत का कोई निश्चित इरादा नहीं दिखता है।’’
उसने कहा, ‘‘अभियोजन पक्ष को यह साबित करना होगा कि क्या अंतिम कृत्य ऐसा था कि यदि उसे टाला नहीं जाता तो इसके परिणामस्वरूप शिकायतकर्ता/पीड़ित की मृत्यु हो जाती।’’
अदालत ने कहा, ‘‘वर्तमान मामले में केवल शिकायतकर्ता/पीड़ित की ओर पिस्तौल तानने से उसकी मृत्यु नहीं होगी। अभियोजन पक्ष का मामला यह नहीं है कि आरोपी को गोली चलाने या ट्रिगर दबाने से रोका गया।’’
भाषा प्रशांत