ममता बनर्जी ने प्रवासी श्रमिकों पर उच्चतम न्यायालय के निर्देशों की तारीफ की, इसे आशा की किरण कहा
राजकुमार वैभव
- 29 Aug 2025, 07:42 PM
- Updated: 07:42 PM
कोलकाता, 29 अगस्त (भाषा) पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य के प्रवासी श्रमिकों से संबंधित एक जनहित याचिका पर उच्चतम न्यायालय के निर्देशों और टिप्पणियों का शुक्रवार को स्वागत किया एवं कहा कि इस आदेश से देश भर में फंसे असंख्य मजदूरों में आशा का संचार हुआ है।
बनर्जी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘माननीय उच्चतम न्यायालय ने आज एक जनहित याचिका पर बंगाल के प्रवासी श्रमिकों के संबंध में ऐतिहासिक निर्देश दिये और टिप्पणियां कीं। एक सीमावर्ती राज्य के रूप में बंगाल की ऐतिहासिक भूमिका को स्वीकार करते हुए, देश की शीर्ष अदालत ने आज यह स्वीकार किया है कि कैसे पीढ़ी दर पीढ़ी बंगाल ने एक शरणस्थली, आशा के स्रोत और संस्कृति के स्थान के रूप में कार्य किया है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘माननीय उच्चतम न्यायालय ने राज्य के माननीय उच्च न्यायालय को प्रवासी श्रमिकों की याचिका पर प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई करने का निर्देश दिया है।’’
पिछले दो महीनों से भाजपा पर बांग्ला भाषी प्रवासियों के खिलाफ ‘‘भाषाई आतंक’’ फैलाने का आरोप लगा रहीं मुख्यमंत्री ने कहा कि अदालत की टिप्पणियों ने आशा की एक बड़ी किरण पैदा की है।
बनर्जी ने लिखा, ‘‘देश के विभिन्न हिस्सों में कड़ी मेहनत करने वाले परिवारों को अब उम्मीद की किरण दिखाई दे रही है। मैं अपने प्रवासी मजदूर भाइयों और बहनों के साथ पूरी तरह खड़ी हूं। हमें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। हमें पूरा विश्वास है कि बंगाल के हर मज़दूर को उनसे सम्मान, गरिमा और संवैधानिक न्याय मिलेगा।’’
शीर्ष अदालत ने शुक्रवार को केंद्र से पूछा कि क्या वह अवैध प्रवासियों को देश में प्रवेश करने से रोकने के लिए अमेरिका की तरह सीमा पर दीवार बनाना चाहता है।
शीर्ष अदालत ने पड़ोसी देशों में रह रहे बांग्ला और पंजाबी भाषी भारतीयों की साझा "सांस्कृतिक और भाषाई विरासत की समान धरोहर" को रेखांकित किया, जो एक ही भाषा बोलते हैं, लेकिन सीमाओं से विभाजित हैं।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने केंद्र से अवैध प्रवासियों को वापस भेजने विशेष रूप से बांग्लादेश भेजने में सरकारों द्वारा अपनाई गई मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) के बारे में जानकारी मांगी।
भाषा राजकुमार