किसानों ने केंद्रीय कृषि मंत्री को ज्ञापन सौंपा, एमएसपी पर कानून की मांग
धीरज सुरेश
- 25 Aug 2025, 10:06 PM
- Updated: 10:06 PM
(तस्वीरों के साथ)
नयी दिल्ली, 25 अगस्त (भाषा) संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) ने सोमवार को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को एक ज्ञापन सौंपकर सभी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी देने तथा भारत और अमेरिका के बीच किसी भी प्रस्तावित व्यापार समझौते से कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों को बाहर रखने की मांग की।
किसान संगठन के मुताबिक, कृषि मंत्री को संबोधित यह ज्ञापन जंतर-मंतर पर आयोजित ‘‘किसान महापंचायत’’ के दौरान दिल्ली पुलिस को सौंपा गया। भारी बारिश और कई जगहों पर पुलिस की नाकेबंदी के कारण यातायात बाधित होने के बावजूद, हजारों किसानों ने इस ‘महापंचायत’ में हिस्सा लिया।
एसकेएम (गैर-राजनीतिक) के अनुसार, कृषि मंत्रालय ने रविवार देर रात पत्र लिखकर कहा कि किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ उनकी लंबित मांगों पर चर्चा के लिए जल्द ही एक बैठक तय की जाएगी।
ज्ञापन में तीन मुख्य मुद्दों को दोहराया गया। इसमें दिल्ली के शंभू, खनौरी और रत्नापुरा सीमा बिंदुओं पर किसानों के आंदोलन के दौरान उठाई गई मांगों को पूरा करना, जिसमें एमएसपी-गारंटी कानून का अधिनियमन, कृषि, डेरी, कुक्कुट और मत्स्य पालन को किसी भी भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के दायरे से बाहर रखना और 2020-21 के आंदोलन के दौरान किसानों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेना शामिल है।
एसकेएम नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा, ‘‘किसानों को बाजार के उतार-चढ़ाव के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि एमएसपी की मांग केवल पंजाब और हरियाणा तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश के किसानों की है।’’
एसकेएम ने दावा किया कि शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित महापंचायत में पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और तमिलनाडु सहित कई राज्यों के किसान नेताओं ने हिस्सा लिया।
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘हमने मौके पर लगभग 1,200 पुलिसकर्मियों को तैनात किया है। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि कोई अप्रिय घटना नहीं हो और कानून-व्यवस्था न बिगड़े।’’
राष्ट्रीय राजधानी में यह महापंचायत 2020 और 2021 के दौरान हुए किसान आंदोलन के लगभग चार साल बाद हुई है। उस वक्त हजारों लोगों ने तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग को लेकर दिल्ली की सीमाओं पर डेरा डाला था।
भाषा धीरज