विधानमंडलों में अनुशासनहीनता विट्ठलभाई पटेल की विरासत को कमजोर कर रही: उपसभापति हरिवंश
संतोष प्रशांत
- 24 Aug 2025, 07:54 PM
- Updated: 07:54 PM
नयी दिल्ली, 24 अगस्त (भाषा) राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने रविवार को आगाह किया कि विधानमंडलों में बढ़ती अनुशासनहीनता और नारेबाजी, एक सदी पहले केंद्रीय विधानसभा की अध्यक्षता करने वाले पहले भारतीय विट्ठलभाई पटेल की लोकतांत्रिक विरासत को कमजोर कर रही है।
वह पटेल के ऐतिहासिक चुनाव के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में दिल्ली विधानसभा द्वारा आयोजित अपने तरह के पहले ‘ऑल इंडिया स्पीकर्स कॉन्फ्रेंस’ के उद्घाटन सत्र में बोल रहे थे।
अपने संबोधन के दौरान उन्होंने कहा कि पटेल का नेतृत्व भारत की संवैधानिक यात्रा में एक निर्णायक क्षण था।
उन्होंने कहा, ‘‘विट्ठलभाई पटेल ने 100 साल पहले केंद्रीय विधान सभा के अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभाला था। अधिकांश भारतीयों के लिए, यह पहली बार था जब किसी भारतीय ने कोई संवैधानिक पद ग्रहण किया था। इस सदन ने बड़ी बहसें देखी हैं जहां गोपाल कृष्ण गोखले, पंडित मदन मोहन मालवीय और तेज बहादुर सप्रू जैसे नेताओं ने रौलट अधिनियम जैसे कानूनों का विरोध किया था।’’
हरिवंश ने इस बात पर जोर दिया कि भारत के लोकतांत्रिक मूल्य उसकी प्राचीन परंपराओं में निहित हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘राजतंत्र में भी, राजा का आसन जनता का आसन माना जाता था। हमारे आदिवासी समाज भी बिना किसी लैंगिक भेदभाव के लोकतांत्रिक मूल्यों का पालन करते थे।’’
उन्होंने आगे कहा, ‘‘हमें असभ्य दिखाने के लिए हमारी संस्कृति को जानबूझकर कम करके आंका गया, लेकिन हमारी परंपराओं में लोकतंत्र के लिखित प्रमाण मौजूद हैं।’’
उन्होंने कहा कि पश्चिमी विचारकों ने भारत के लोकतांत्रिक अस्तित्व पर बार-बार संदेह किया, लेकिन देश ने उन्हें गलत साबित कर दिया। हरिवंश ने विधायिकाओं में आत्मनिरीक्षण की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
उपसभापति ने कहा, ‘‘मुझे स्वीकार करना होगा कि हम विट्ठलभाई पटेल जैसे हमारे निर्माताओं द्वारा स्थापित लोकतांत्रिक मूल्यों की विरासत के साथ न्याय नहीं कर रहे हैं। हमारी विधानसभाओं में बढ़ती अनुशासनहीनता और अनावश्यक नारे सत्रों को बर्बाद करते हैं। हमें यह सोचने की जरूरत है कि क्या हम इस तरह के आचरण से कोई सेवा कर रहे हैं।’’
दिल्ली विधानसभा द्वारा पहली बार आयोजित किए जा रहे इस दो दिवसीय सम्मेलन में राज्य विधानसभाओं के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष एकत्र हो रहे हैं। इसमें विधान परिषदों के भी सभापति और उपसभापति भाग ले रहे हैं।
भाषा संतोष