गुवाहाटी विश्वविद्यालय की शोध टीम को मोटापे से निपटने के लिए पौधा-आधारित फॉर्मूलेशन का पेटेंट मिला
आशीष पवनेश
- 23 Aug 2025, 09:26 PM
- Updated: 09:26 PM
गुवाहाटी, 23 अगस्त (भाषा) गुवाहाटी विश्वविद्यालय के प्राणीशास्त्र विभाग के चार शोधकर्ताओं की एक टीम ने मोटापे और इससे जुड़ी जटिलताओं को दूर करने के संबंध में पौधा-आधारित फॉर्मूलेशन के लिए पेटेंट हासिल किया है।
विश्वविद्यालय की ओर से शनिवार को जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया कि पेटेंट संख्या 569904 को भारतीय पेटेंट कार्यालय द्वारा 20 अगस्त को आधिकारिक रूप से प्रदान किया गया।
शोधकर्ताओं ने कहा कि यह पेटेंट दो पौधों, फिलैंथस यूरिनेरिया (पारंपरिक रूप से मूत्र संबंधी बीमारियों के लिए इस्तेमाल किया जाता है) और अधातोडा वासिका नीस (खांसी और श्वसन संबंधी समस्याओं के इलाज के लिए मूल्यवान) के एक विशिष्ट औषधीय संयोजन को संरक्षित करता है और मोटापे से निपटने में इन पौधों के इस्तेमाल की यह पहली रिपोर्ट है।
उन्होंने बताया कि दोनों पौधों की समान मात्रा को मिश्रित करके तथा पानी और इथेनॉल के मिश्रण से अर्क तैयार करके, शोधकर्ताओं ने एक नया चिकित्सीय समाधान विकसित किया है।
प्रयोगशाला में चूहों पर किए गए परीक्षणों से आशाजनक परिणाम सामने आए, जिनमें शरीर में वसा की कमी, ट्राइग्लिसराइड्स और एलडीएल जैसे हानिकारक कोलेस्ट्रॉल के स्तर में कमी, तथा समग्र वजन में कमी शामिल है।
शोधकर्ताओं ने कहा कि यह मोटापे के प्रबंधन में सुरक्षित, पौधा-आधारित विकल्पों के लिए नए द्वार खोलता है, तथा आधुनिक विज्ञान के साथ प्राचीन उपचारों का सार्थक मिश्रण प्रस्तुत करता है।
शोधकर्ताओं-मानस दास, प्रीतिमोनी दास, प्रांजन बर्मन और नबा कुमार हजारिका ने कहा कि उनके काम के लिए पेटेंट प्राप्त करना प्राकृतिक स्वास्थ्य समाधानों के लिए एक बड़ा बढ़ावा है।
असम के शिक्षा मंत्री रनोज पेगू ने इस उपलब्धि पर शोध टीम को बधाई दी। मंत्री ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, "यह उपलब्धि अकादमिक अनुसंधान की शक्ति को उजागर करती है, और मैं सभी उच्च शिक्षा संस्थानों से आग्रह करता हूं कि वे ऐसे नवाचार को प्रोत्साहित करें जो ज्ञान को समाज के लिए समाधान में बदल दे।"
गुवाहाटी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर नानी गोपाल महंत ने कहा कि यह पेटेंट संस्थान के पारंपरिक ज्ञान को व्यावहारिक स्वास्थ्य सहायता में बदलने पर ध्यान केंद्रित करने को दर्शाता है।
भाषा आशीष