रूस एवं चीन मिलकर भारत करेगा अमेरिका की गुंडागर्दी खत्म: स्वामी रामदेव
राजकुमार
- 15 Aug 2025, 10:02 PM
- Updated: 10:02 PM
(फाइल फोटो के साथ)
हरिद्वार, 15 अगस्त (भाषा) योग गुरु स्वामी रामदेव ने शुक्रवार को दावा किया कि भारत जल्द ही रूस और चीन के साथ मिलकर अमेरिका की ‘राजनीतिक और आर्थिक गुंडागर्दी’ खत्म कर देगा।
यहां 79 वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पतंजलि विश्वविद्यालय और पतंजलि योग भवन में ध्वजारोहण करने के बाद स्वामी रामदेव ने दावा किया कि विश्व में भारत, रूस एवं चीन तथा यूरोप और मध्य एशिया के कुछ देशों के बीच एक नया गठजोड़ बन रहा है।
इस गठजोड़ को विश्व के लिए एक बहुत अच्छा संदेश बताते हुए योग गुरू ने कहा कि भारत ने ‘अमेरिका के सामने झुकने का नहीं, खड़े होने’ का फैसला किया है।
भारत की अर्थव्यवस्था को मृत बताने वाले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर हमला बोलते हुए रामदेव ने कहा, ‘‘यह न केवल जीवंत है बल्कि तेजी से प्रगति कर रही है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘300 साल पहले भारत की अर्थव्यवस्था 400 से 500 ‘ट्रिलियन (एक ट्रिलियन एक हजार अरब के बराबर होता है)’ डॉलर की थी जिसे पहले मुगलों ने और फिर अंग्रेजों ने लूटा मगर भारत आज भी सीना तान कर खड़ा हुआ है।’’
रामदेव ने कहा,‘‘हमें भारत को स्वावलंबी बनाना है और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देना है।’’
इस अवसर पर पतंजलि योगपीठ के कार्यकर्ताओं और साधु संन्यासियों को स्वामी रामदेव ने आर्थिक, शैक्षिक, चिकित्सा के क्षेत्र में वैचारिक आजादी और बौद्धिक आजादी पाने के लिए स्वदेशी अपनाने का संकल्प दिलवाया।
योग गुरु ने कहा,‘‘अमेरिका की राजनीतिक और आर्थिक गुंडागर्दी को खत्म करने के लिए भारत दुनिया में एक नया ‘वर्ल्ड ऑर्डर’ बनाने में लगा हुआ है। अगर रूस, चीन, भारत, मध्य एशिया के कुछ देश और कुछ यूरोपीय देशों के बीच नया गठजोड़ बना तो हम अमेरिका और ट्रंप को उसकी औकात बता देंगे तथा फिर दुनिया में ट्रंप और अमेरिका का साम्राज्य नहीं होगा ।’’
पाकिस्तान की परमाणु धमकी पर स्वामी रामदेव ने उसकी खिल्ली उड़ायी और कहा कि उसके पास जो परमाणु बम हैं, वे भी उसके नहीं, बल्कि दूसरे देश के है और उसी के नियंत्रण में हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘ यही नहीं जिस देश के परमाणु बम हैं, उसने उन्हें भारत पर दबाव बनाने के लिए छिपा कर रखा हुआ है। लेकिन भारत ने ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान को घुटनों पर लाकर उसकी इस गीदड़ भभकी की हवा निकल दी।’’
भाषा सं दीप्ति