फडणवीस ने शिंदे के ‘जय गुजरात’ नारे का बचाव किया, सपकाल ने ‘सियासी गुलामी’ करार दिया
शफीक नरेश
- 04 Jul 2025, 09:01 PM
- Updated: 09:01 PM
मुंबई, चार जुलाई (भाषा) महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे द्वारा पुणे में एक कार्यक्रम में ‘जय गुजरात’ का नारा लगाने को लेकर शुक्रवार को राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई और कांग्रेस ने इसे ‘‘चापलूसी और सियासी गुलामी’’ करार देते हुए शिंदे के इस्तीफे की मांग की जबकि मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने अपने मंत्रिमंडल सहयोगी का बचाव किया।
एक अन्य विपक्षी पार्टी राकांपा (एसपी) ने कहा कि ऐसा नारा लगाकर शिंदे ने मराठी मानुष को ‘‘धोखा’’ दिया है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में आयोजित एक कार्यक्रम में शिंदे ने ‘‘जय हिंद, जय महाराष्ट्र, जय गुजरात’’ का नारा लगाया था।’’
शाह ने गुजराती भाषा में लोगों को संबोधित किया था।
फडणवीस ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘सिर्फ इसलिए कि शिंदे ने जय गुजरात कहा, इसका अभिप्राय यह नहीं है कि वह महाराष्ट्र से ज्यादा गुजरात से प्यार करते हैं। ऐसी संकीर्ण सोच मराठी मानुष को शोभा नहीं देती।’’
फडणवीस ने याद दिलाया कि जब कर्नाटक के चिकोडी में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा का अनावरण किया गया था, तब पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद पवार ने ‘जय महाराष्ट्र, जय कर्नाटक’ का नारा लगाया था।
उन्होंने सवाल किया, ‘‘क्या इसका अभिप्राय यह है कि शरद पवार कर्नाटक से ज्यादा प्यार करते हैं और महाराष्ट्र से कम?’’
इस बीच, कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने शिंदे पर तीखा हमला करते हुए इसे ‘‘सियासी गुलामी’’ करार दिया। उन्होंने राज्य के गौरव के साथ ‘विश्वासघात’ करने के लिए शिंदे से इस्तीफा देने की मांग की।
सपकाल ने एक बयान में कहा, ‘‘महाराष्ट्र छत्रपति शिवाजी महाराज की भूमि है, जो आत्मसम्मान और संप्रभुता के लिए खड़े थे। यह शर्म की बात है कि उपमुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठा एक नेता ‘जय महाराष्ट्र’ के बजाय ‘जय गुजरात’ का नारा लगाए। यह सियासी गुलामी के अलावा और कुछ नहीं है।’’
सपकाल ने दावा किया कि मूल शिवसेना को तोड़ने और गुजरात की ताकतों द्वारा पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न से पुरस्कृत होने के बाद, शिंदे ने अपने राजनीतिक आकाओं को खुश करने के लिए सभी सीमाएं पार कर दी हैं।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा, ‘‘उनका ‘जय गुजरात’ का नारा महज चाटुकारिता नहीं है, बल्कि यह हर गौरवान्वित महाराष्ट्रवासी का अपमान है। शिंदे के कार्य दर्शाते हैं कि मौजूदा शासन में महाराष्ट्र की राजनीति में गुजरात का प्रभाव कितना गहरा हो गया है।’’
सपकाल ने सवाल किया कि क्या शिंदे भूल गए हैं कि वह गुजरात के नहीं बल्कि महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार उद्योगों और परियोजनाओं को पड़ोसी राज्य की ओर मोड़ रही है।
कांग्रेस नेता ने दावा किया, ‘‘वेदांता-फॉक्सकॉन से लेकर कई अन्य प्रमुख परियोजनाओं सहित उद्योग, कॉरपोरेट कार्यालय और हजारों करोड़ रुपये का निवेश गुजरात में स्थानांतरित किया जा रहा है। इससे महाराष्ट्र को अपने युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों के क्षेत्र में भारी नुकसान उठाना पड़ा है। यह सब शिंदे और फडणवीस की देखरेख में हो रहा है।’’
राज्य में बढ़ती बेरोजगारी, कृषि संकट और महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों का हवाला देते हुए सपकाल ने कहा कि सरकार को ‘‘राजनीतिक चापलूसी और क्षेत्रीय तुष्टिकरण’’ में लिप्त होने के बजाय इन ज्वलंत मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
सपकाल ने कहा, ‘‘महाराष्ट्र के हितों से समझौता करने वालों के लिए राज्य के नेतृत्व में कोई जगह नहीं है। एकनाथ शिंदे को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए।’’
इस बीच, राकांपा (एसपी) प्रवक्ता क्लाइड क्रैस्टो ने कहा, ‘‘आज यह साबित हो गया कि जब एकनाथ शिंदे को महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बनाया गया था, तो राज्य के लिए बनाई गई परियोजनाएं गुजरात क्यों स्थानांतरित होती रहीं। सच्चाई यह है कि वह गुजरात की ‘जय’ के लिए काम कर रहे थे।’’
उन्होंने कहा कि शिंदे मराठी मानुष के समर्थन से सत्ता में आए थे, लेकिन आज उन्होंने मराठी मानुष के साथ ‘‘विश्वासघात’’ किया है।
भाषा शफीक