जेएनयू ने पूर्वोत्तर के प्रतिनिधित्व को बढ़ावा देने के लिए बराक छात्रावास का उद्घाटन किया
संतोष माधव
- 07 Apr 2025, 08:59 PM
- Updated: 08:59 PM
नयी दिल्ली, सात अप्रैल (भाषा) जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) ने सोमवार को एक नए छात्रावास का उद्घाटन किया जिसका उद्देश्य समावेशिता को बढ़ावा देना और पूर्वोत्तर क्षेत्र के छात्रों के लिए समर्पित स्थान प्रदान करना है।
जेएनयू की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि बराक छात्रावास का उद्घाटन जेएनयू की कुलपति शांतिश्री धुलीपुडी पंडित और भारत सरकार के तहत पूर्वोत्तर परिषद की सलाहकार शेरी की अगुवाई में हुआ। छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कुलपति ने छात्रावास के लिए धन मुहैया कराने के लिए पूर्वोत्तर परिषद के प्रति आभार व्यक्त किया और बहुसंस्कृतिवाद के प्रति जेएनयू की प्रतिबद्धता पर जोर दिया।
पंडित ने कहा, ‘‘जेएनयू के अन्य सभी छात्रावासों की तरह बराक छात्रावास में भी देश भर के छात्र रहेंगे। जेएनयू एक राष्ट्रीय विश्वविद्यालय है, जहां विविधता का जश्न मनाया जाता है।’’
शेरी ने इस पहल का स्वागत किया और कहा कि नई सुविधा समावेशिता को बढ़ावा देगी। उन्होंने कहा, ‘‘हमें खुशी है कि यह छात्रावास आखिरकार खुल रहा है। पूर्वोत्तर के छात्रों को समर्थन देने के साथ-साथ पूरे भारत से अन्य लोगों को समायोजित करने के लिए किए गए प्रशासन के प्रयास उत्साहजनक हैं।’’
‘डीन ऑफ स्टूडेंट्स’ मनुराधा चौधरी ने आश्वासन दिया कि प्रशासन छात्रावास के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करेगा।
चौधरी ने यह भी बताया कि पांच मंजिला इमारत में 228 कमरे हैं और इसमें 446 छात्र रह सकते हैं, जिसमें लड़के और लड़कियों के लिए अलग-अलग परिसर हैं। प्रभावी प्रबंधन के लिए दो वार्डन नियुक्त किए गए हैं।
बयान के अनुसार, वाई-फाई, मेस, वाटर कूलर, मनोरंजन और आगंतुकों के कमरे, खेल के मैदान और दिव्यांगों के लिए सुलभ शौचालय सहित आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित बराक छात्रावास जेएनयू के आवासीय बुनियादी ढांचे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनने के लिए तैयार है।
हालांकि, चार फरवरी, 2024 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा इसका ई-उद्घाटन किया गया था, लेकिन अब तक यह चालू नहीं हुआ था। छात्र प्रशासन से इस सुविधा को जल्द से जल्द शुरू करने का आग्रह कर रहे थे।
इस छात्रावास की कुल क्षमता का 75 प्रतिशत हिस्सा पूर्वोत्तर के छात्रों के लिए आरक्षित है।
भाषा संतोष