बंगाल में ‘गेंदू’ और ‘बाघू’ मतदाताओं को कर रहे प्रेरित
शोभना नरेश गोला
- 12 Apr 2024, 02:23 PM
- Updated: 02:23 PM
(सुप्रतीक सेनगुप्त)
कोलकाता,12 अप्रैल (भाषा) पश्चिम बंगाल में लोकसभा चुनाव में लोगों को मतदान के लिए प्रेरित करने के वास्ते ‘गेंदू’ से लेकर ‘बाघू’ जैसे पशुओं के शुभंकरों का सहारा लिया जा रहा है।
राज्य भर में जिला चुनाव अनुभाग मतदाताओं को मतदान केंद्रों तक ले जाने के लिए विभिन्न शुभंकरों का उपयोग कर रहे हैं और उनमें से अधिकांश शुभंकर पशु हैं।
अलीपुरद्वार जिले में मतदाताओं को प्रेरित करने के लिए दुआर्स क्षेत्र के गैंडों को ध्यान में रखते हुए ‘गेंदू’ का इस्तेमाल किया जा है। कूचबिहार जिले में यह शुभंकर ‘मोहनबाओ’ है। मोहनबाओ एक कछुआ है जो मतदान केंद्रों पर लोगों का मार्गदर्शन करेगा।
बंगाल टाइगर ‘बाघू’ दक्षिण 24 परगना जिले के लोगों से आग्रह कर रहा है कि वे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेने का मौका न चूकें। वहीं दार्जिलिंग की पहाड़ियों में यही काम एक लाल पांडा कर रहा है।
एक निर्वाचन अधिकारी ने कहा,‘‘ हमारे अभियान से बंगाल की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता पर प्रकाश डाला गया है और इसका उद्देश्य मतदाताओं को चुनावी प्रक्रिया में भाग लेने के लिए प्रेरित करना है।’’
उन्होंने कहा,‘‘बोलचाल की भाषा के बजाय हम उन पात्रों के साथ मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं जो उनके दिल के करीब हैं। हमारा मानना है कि इससे काफी प्रभाव पड़ेगा।’’
जलपाईगुड़ी जिले में चुनावी शुभंकर ‘तीस्ता’ है। यह नदी क्षेत्र की जीवन रेखा है और एक लड़की का नाम तीस्ता रखा गया है, जो लोगों को मतदान के लिए प्रेरित कर रही है।
तटीय जिले पूर्व मेदिनीपुर में केकड़ों पर आधारित एक पात्र मतदाताओं को मतदान के लिए प्रेरित कर रहा है जबकि हुगली में महेश की जगन्नाथ रथयात्रा होर्डिंग्स और पोस्टर के जरिए निर्वाचन आयोग के संदेश मतदाताओं तक पहुंचा रही है।
बांकुड़ा के प्रसिद्ध टेराकोटा घोड़ों पर आधारित ‘घोटोकनाथ’ लोगों को उनके जिले की सांस्कृतिक विरासत की याद दिलाने के अलावा उनसे मतदान करने का अनुरोध कर रहा है।
कोलकाता के केके दास कॉलेज में बांग्ला भाषा की प्रोफेसर अंजना ब्रह्मा ने कहा,‘‘ इस तरह की पहल से लोगों में न केवल चुनाव के बारे में बल्कि अपने क्षेत्र की विरासत, संस्कृति और प्राकृतिक संसाधनों के बारे में भी जागरुकता बढ़ती है।’’
भाषा शोभना नरेश गोला