असम में 80,000 करोड़ रुपये की सड़क परियोजनाओं पर काम जल्द शुरू होगा: गडकरी
निहारिका अजय
- 26 Feb 2025, 05:53 PM
- Updated: 05:53 PM
(फाइल फोटो के साथ)
गुवाहाटी, 26 फरवरी (भाषा) सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार को कहा कि असम में 80,000 करोड़ रुपये की सड़क परियोजनाओं पर काम जल्द ही शुरू होगा।
उन्होंने कहा कि इस पहल के तहत ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे एक सुरंग, काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में एक एलिवेटेड कॉरिडोर और गुवाहाटी रिंग रोड सहित प्रमुख परियोजनाएं शुरू की जाएंगी।
‘एडवांटेज असम 2.0 व्यापार शिखर सम्मेलन’ में सड़क, रेलवे और नदी अवसंरचना पर आयोजित सत्र को ऑनलाइन संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि 2029 तक उनके मंत्रालय के तहत राज्य में तीन लाख करोड़ रुपये की परियोजनाएं पूरी हो जाएंगी।
उन्होंने कहा कि राज्य में 60,000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं पर काम पहले से ही जारी है और वे विभिन्न चरणों में पूरी हो रही हैं।
मंत्री ने कहा कि इनमें वे परियोजनाएं शामिल हैं जो न केवल राज्य के भीतर संपर्क में सुधार करेंगी बल्कि त्रिपुरा और नगालैंड के साथ सड़क संचार को भी बढ़ावा देंगी।
गडकरी ने कहा कि राज्य में 80,000 करोड़ रुपये की अन्य परियोजनाएं शुरू होने वाली हैं। इसके तहत प्रमुख परियोजनाओं में नुमालीगढ़ और धौलपुर को जोड़ने वाली ब्रह्मपुत्र के नीचे 15,000 करोड़ रुपये की सुरंग, काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में 6,000 करोड़ रुपये का एलिवेटेड कॉरिडोर और गुवाहाटी रिंग रोड शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि जोगीघोपा में ‘मल्टी-मॉडल’ लॉजिस्टिक्स केंद्र लगभग पूरा हो चुका है और इसे जल्द ही खोला जा सकता है।
बांस आधारित नए युग के उद्योग में असम की क्षमता को उल्लेख करते हुए गडकरी ने ईंधन निर्माण और अन्य आर्थिक क्षेत्रों में इसकी भूमिका पर जोर दिया।
गडकरी ने दावा किया कि राज्य सरकार द्वारा मांगी गई लगभग सभी परियोजनाओं को उनके मंत्रालय ने मंजूरी दे दी है।
उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर का विकास प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नीत सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है, जैसा कि 2014 से इस क्षेत्र में किए गए पर्याप्त निवेश से स्पष्ट है।
गडकरी ने कारोबार में पूंजी निवेश की जरूरत पर जोर दिया, क्योंकि निवेश आने पर ही नौकरियां सृजित होंगी और रोजगार सृजन से ही लोगों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।
मंत्री ने कहा, ‘‘ राज्य के विकास के लिए बुनियादी ढांचा सबसे जरूरी है। संपर्क में सुधार से अन्य क्षेत्रों को भी फायदा होगा।’’
भाषा निहारिका