पूर्व उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने मातृभाषा की वकालत की
आशीष पवनेश
- 24 Jan 2025, 08:43 PM
- Updated: 08:43 PM
अहमदाबाद, 24 जनवरी (भाषा) पूर्व उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने शुक्रवार को कहा कि हमारी मातृभाषा हमारी दृष्टि की तरह है और हमें उसी में संवाद करना चाहिए।
गुजरात विश्वविद्यालय के 73वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए नायडू ने कहा कि व्यक्ति को अपनी मां, मातृभूमि और मातृभाषा का सम्मान करना चाहिए।
उन्होंने युवाओं को लोकतंत्र का सम्मान करने की सलाह दी, जो योग्यता के आधार पर किसी भी व्यक्ति को शीर्ष पर पहुंचने का मौका देता है।
नायडू ने कहा, ‘‘हमें अपनी मां, मातृभूमि और मातृभाषा का सम्मान करना चाहिए। मातृभाषा हमारी दृष्टि की तरह है और हमें अपने माता-पिता, पड़ोसियों और अन्य लोगों के साथ इसी भाषा में संवाद करना चाहिए।’’
उन्होंने कहा कि हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि किसी को अन्य भाषाएं नहीं सीखनी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘मातृभाषा पहले, फिर दूसरी भाषाएं आती हैं। दक्षिण भारत में, मुझे बताया गया कि हिंदी हम पर थोपी जा रही है। मैंने कहा कि कोई भाषा थोपी नहीं जानी चाहिए, लेकिन इसका विरोध भी नहीं होना चाहिए। हिंदी देश में सबसे अधिक इस्तेमाल की जाने वाली भाषा है। आपको अंग्रेजी भी सीखनी चाहिए और फिर फ्रेंच जैसी विदेशी भाषाएं सीखनी चाहिए।’’
पूर्व उपराष्ट्रपति ने सेलफोन के ज्यादा इस्तेमाल के खिलाफ भी युवाओं को आगाह किया। नायडू ने कहा, ‘‘सेलफोन उपयोगी है, लेकिन अगर आप इसका अत्यधिक इस्तेमाल करेंगे तो ये नुकसान पहुंचाएगा। इससे आपका ध्यान प्रभावित होगा, जो सफलता के लिए एक शर्त है। सेलफोन का अत्यधिक इस्तेमाल आपको अपने काम पर ध्यान केंद्रित करने नहीं देगा।’’
नायडू ने कहा कि देश के युवाओं को लोकतंत्र को संजोकर रखना चाहिए, जो ‘‘किसी को भी शीर्ष स्तर तक पहुंचने का मौका देता है’’ बशर्ते कि कोई ‘‘ऊंचे सपने देखे और कड़ी मेहनत करे।’’
उन्होंने कहा, ‘‘पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने अपनी आत्मकथा में लिखा है कि जब वह युवा थे तो अखबार बांटते थे। रेलवे स्टेशन पर अपने परिवार की चाय बेचने में मदद करने वाला एक व्यक्ति अब देश का प्रधानमंत्री है। आप सभी जानते हैं कि यह नरेन्द्र मोदी हैं।’’
नायडू ने लोकतंत्र की ताकत को रेखांकित करने के लिए अपना उदाहरण देते हुए कहा कि वह अपने परिवार में पहले स्नातक थे और देश के उपराष्ट्रपति बने।
भाषा आशीष