एनसीसी कैडेट्स को प्रधानमंत्री के ‘विकसित भारत’ के सपने को पूरा करने में योगदान देना चाहिए: राजनाथ
जोहेब नरेश
- 20 Jan 2025, 08:02 PM
- Updated: 08:02 PM
नयी दिल्ली, 20 जनवरी (भाषा) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) के पूर्व कैडेट हैं और भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के उनके दृष्टिकोण को साकार करने में एनसीसी कैडेट्स को योगदान देना चाहिए।
राजनाथ सिंह ने दिल्ली छावनी में जारी गणतंत्र दिवस राष्ट्रीय कैडेट कोर शिविर के दौरे पर कैडेट और अधिकारियों की एक सभा को संबोधित करते हुए यह भी कहा कि वह एनसीसी कैडेट्स में भारत की छवि देखते हैं।
देश भर से कुल 2,361 एनसीसी कैडेट एक महीने तक चलने वाले इस शिविर में भाग ले रहे हैं। यह शिविर 30 दिसंबर से शुरू हुआ है और 27 जनवरी को प्रधानमंत्री की रैली के साथ इसका समापन होगा।
इस वार्षिक कार्यक्रम में 917 लड़कियां कैडेट भी भाग ले रही हैं, जो अब तक का सबसे बड़ा दल है।
एनसीसी शिविर में कैडेट्स की एकता और अनुशासन की सराहना करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘ भारत में शरीर अनेक हो सकते हैं लेकिन आत्मा एक है, अनेक शाखाएं हैं लेकिन जड़ एक है, अनेक किरणें हैं, लेकिन प्रकाश पुंज एक है।’’
अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री ने बताया कि राजनीति में आने से पहले वह स्वयं ‘‘एक छात्र, एनसीसी के कैडेट और भौतिक विज्ञान के शिक्षक थे।’’
उन्होंने कहा कि कैडेट्स की ऊर्जा और उत्साह दर्शाता है कि भारत का भविष्य उज्ज्वल है और उज्ज्वल रहेगा। सिंह ने कहा कि एनसीसी युवाओं में नेतृत्व की गुणवत्ता और अनुशासन का संचार करती है।
सिंह ने सरकार के 'विकसित भारत' विजन के बारे में भी बात की और बताया कि 1947 में मिली आजादी के 100 साल पूरे होने तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के महत्वाकांक्षी विजन को साकार करने में कैडेट क्या भूमिका निभा सकते हैं।
सिंह ने कहा, "खुद एनसीसी के पूर्व कैडेट हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2047 तक 'विकसित भारत' का विजन रखा है। इसलिए, इसके मौजूदा कैडेटों की जिम्मेदारी है कि वे उनके 'विकसित भारत' सपने में योगदान दें।"
हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि 'विकसित भारत' का मतलब केवल जमीन पर भौतिक विकास नहीं है, बल्कि पूरे समाज का समग्र विकास है।
कैडेटों में युवावस्था में अनुशासन और नेतृत्व के गुण विकसित करने में एनसीसी की भूमिका की प्रशंसा करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि कैडेटों के अंदर एक 'चिंगारी' होती है जो उनके लिए इस तरह से जीवन जीने का तरीका बनाती है कि चाहे वे बाद में कोई भी पेशा चुनें, वे सभी राष्ट्र निर्माण में योगदान देंगे।
भाषा जोहेब