महिला आरक्षण विधेयक: भाजपा की गोवा इकाई की महिला कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस के ख़िलाफ प्रदर्शन किया
वैभव
- 21 Apr 2026, 03:08 PM
- Updated: 03:08 PM
पणजी, 21 अप्रैल (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की गोवा इकाई की महिला कार्यकर्ताओं ने संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक को पारित करने का विरोध करने पर कांग्रेस के खिलाफ मंगलवार को यहां मार्च निकाला।
गोवा प्रदेश महिला मोर्चा की अध्यक्ष सुवर्णा तेंदुलकर के नेतृत्व में सैकड़ों महिला कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की और शहर में स्थित कांग्रेस कार्यालय तक मार्च किया।
प्रदर्शन से पहले मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत, भाजपा की गोवा इकाई के अध्यक्ष दामोदर नाइक, विधायक डॉ. देविया राणे और डेलिलाह लोबो ने भाजपा कार्यालय में प्रदर्शनकारियों को संबोधित किया।
मुख्यमंत्री सावंत ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह मोदी सरकार द्वारा महिला केंद्रित शासन की दिशा में उठाए गए हर कदम का विरोध कर रही है। उन्होंने कहा कि विपक्ष नागरिकता संशोधन विधेयक जैसी नीतियों का भी विरोधी है, जिसका उद्देश्य देश से घुसपैठियों को बाहर निकालना था।
सावंत ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन का उद्देश्य पंचायतों से लेकर संसद तक महिलाओं को प्रतिनिधित्व देना है। उन्होंने कहा कि यदि यह विधेयक पारित हो जाता, तो 273 महिलाओं को संसद में अपने क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिलता।
वहीं, दामोदर नाइक ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि देशभर की महिलाओं ने इस कानून को पारित नहीं होने देने के कांग्रेस के कदम की निंदा की है। उन्होंने कहा कि इस कानून का नाम 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' इसलिए रखा गया क्योंकि इसका लक्ष्य महिलाओं को सशक्त बनाना और निर्णय लेने की प्रक्रिया में उनकी भूमिका सुनिश्चित करना है।
लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 2029 के आम चुनावों से महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने वाला संविधान संशोधन विधेयक 17 अप्रैल को संसद के निचले सदन में पारित नहीं हो सका।
लोकसभा में संविधान (131वां) संशोधन विधेयक, 2026 पर मत विभाजन के दौरान पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े।
लोकसभा में किसी भी संविधान संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है।
विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि परिसीमन प्रक्रिया से जुड़े इस विधेयक के लागू होने से दक्षिण भारतीय राज्यों का प्रतिनिधित्व कम हो जाता।
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