पुतिन ने भारत को 'भरोसेमंद साझेदार' बताया, भारत-रूस संबंधों में पश्चिमी दखल की आलोचना की
मनीषा
- 05 Jun 2026, 11:55 AM
- Updated: 11:55 AM
(विजय जोशी)
सेंट पीटर्सबर्ग (रूस), पांच जून (भाषा) रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बृहस्पतिवार को भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी की सराहना करते हुए कहा कि नयी दिल्ली को मॉस्को के साथ सहयोग कम करने के लिए मजबूर करने की पश्चिमी देशों की कोशिशें न केवल व्यर्थ हैं, बल्कि वैश्विक स्थिरता के लिए भी नुकसानदायक हैं।
'पीटीआई' समेत प्रमुख वैश्विक समाचार एजेंसियों के प्रमुखों के साथ बातचीत में पुतिन ने भारत की आर्थिक वृद्धि और उसकी स्वतंत्र विदेश नीति की प्रशंसा की तथा कहा कि रूस, भारत के साथ अपने आर्थिक संबंधों को और विस्तार देने के लिए प्रतिबद्ध है।
पुतिन ने कहा, ''भारत दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और इस समय प्रभावशाली आर्थिक वृद्धि दर प्रदर्शित कर रहा है।'' उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब अमेरिकी डॉलर के स्तर तक पहुंच जाएगा।
उन्होंने कहा कि रूस को भारत पर पश्चिमी देशों के उस दबाव का कोई नकारात्मक प्रभाव दिखाई नहीं दिया है, जिसके तहत नयी दिल्ली से रूस के साथ अपने संबंध सीमित करने को कहा जा रहा है। उनका मानना है कि ऐसी रणनीतियां अंततः उल्टा असर डालेंगी।
पुतिन ने कहा, ''सभी को समझ आ गया है कि दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले देश भारत और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर दबाव डालना अंतरराष्ट्रीय संबंधों और द्विपक्षीय संबंधों के लिए हानिकारक है। यह दबाव कहीं से भी आए, इससे फर्क नहीं पड़ता।''
उन्होंने कहा, ''हमें इसका कोई नकारात्मक परिणाम नहीं दिखा।''
रूसी राष्ट्रपति की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब कुछ पश्चिमी देशों में भारत-रूस संबंधों को लेकर असहजता बढ़ी है। अमेरिका लगातार भारत से रूसी कच्चे तेल की खरीद कम करने का आग्रह करता रहा है।
पुतिन ने 'पीटीआई' के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रधान संपादक विजय जोशी के एक सवाल पर कहा, ''भारत दुनिया की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, जिसने सबसे अधिक आर्थिक वृद्धि दर दिखाई है। यह अपने आप नहीं हुआ है। यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार की कड़ी मेहनत का परिणाम है।''
पुतिन ने जोर देकर कहा कि भारत आगे भी अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ भारत के राजनयिक संबंध रूस के साथ उसके पुराने और भरोसेमंद रिश्तों में कोई बाधा नहीं डालते।
यह पूछे जाने पर कि क्या भारत और अमेरिका के बढ़ते संबंधों से रूस के लिए किसी तरह का टकराव या असहजता की स्थिति पैदा होती है, पुतिन ने कहा, ''हमें खुशी है कि भारत उन सभी देशों के साथ अपने संबंध विकसित कर रहा है जिन्हें वह अपने राष्ट्रीय हितों के लिए महत्वपूर्ण समझता है।''
पुतिन ने कहा कि रूस, भारत को एक ''भरोसेमंद साझेदार'' मानता है और नयी दिल्ली के किसी अन्य देश के साथ संबंधों से उसे कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं दिखता।
उन्होंने कहा, ''भारत एक महान राष्ट्र और लोकतंत्र है तथा रूस उसके साथ अपने संबंधों का विस्तार करता रहेगा।''
यूक्रेन संघर्ष से जुड़े एक सवाल पर पुतिन ने कहा कि वह इस विवाद का समाधान चाहते हैं और अब मुख्य चुनौती कीव को इसके लिए मनाना है।
उन्होंने यह विचार भी खारिज कर दिया कि यूरोपीय संघ के देश यूक्रेन के साथ शांति वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभा सकते हैं।
रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि यूरोपीय संघ हथियारों की आपूर्ति करने के बजाय यदि कीव को समझौते के लिए राजी करे तो वह संघर्ष के समाधान में अधिक मददगार हो सकता है।
उन्होंने कहा कि यूक्रेन संकट एक ''स्थानीय'' मुद्दा है, जबकि ईरान का मुद्दा वैश्विक महत्व का है।
पुतिन ने कहा, ''रूस उन पर कैसे भरोसा कर सकता है जो वर्षो से रूस को रणनीतिक रूप से पराजित करने की बात करते आ रहे हैं?''
उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में तनाव कम करने में मददगार किसी भी निर्णय का रूस समर्थन करने के लिए तैयार है।
उन्होंने यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की की वैधता पर भी सवाल उठाया और कहा कि उनका राष्ट्रपति पद का कार्यकाल समाप्त हो चुका है।
पुतिन ने कहा, ''वे चुनाव कराएंगे या नहीं? हमें ये सवाल पूछने चाहिए।''
भाषा गोला मनीषा
मनीषा
0506 1155 सेंट पीटर्सबर्ग