संपत्ति बिक्री पर इंडेक्सेशन-रहित एलटीसीजी व्यवस्था करदाताओं के लिए फायदेमंदः सीबीडीटी प्रमुख
प्रेम प्रेम अजय
- 24 Jul 2024, 06:31 PM
- Updated: 06:31 PM
(नीलाभ श्रीवास्तव)
नयी दिल्ली, 24 जुलाई (भाषा) केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के चेयरमैन रवि अग्रवाल ने बुधवार को कहा कि रियल एस्टेट लेनदेन से ‘इंडेक्सेशन’ लाभ को हटाने का कदम ‘वास्तविक बाजार गतिशीलता’ के नजरिये से देखने पर करदाताओं के लिए फायदेमंद साबित होगा।
प्रत्यक्ष कर गतिविधियों का संचालन करने वाली इकाई सीबीडीटी के प्रमुख ने बजट के बारे में पीटीआई-भाषा के साथ बातचीत में कहा कि नई व्यवस्था के तहत एक करदाता के लिए ‘कम कर देनदारी’ बनेगी। उन्होंने कहा कि संसद में बजटीय उपायों की घोषणा के पहले विभाग ने इस संदर्भ में ‘कुछ गणनाएं’ की थीं।
बजट 2024-25 ने लंबी अवधि के लिए रखी गई आवासीय इकाइयों की बिक्री से अर्जित पूंजीगत लाभ पर कर को 20 प्रतिशत से घटाकर कम कर दिया है। हालांकि, इस क्रम में करदाताओं को मिल रहे इंडेक्सेशन लाभ को हटा दिया गया है।
‘इंडेक्सेशन’ एक ऐसी प्रणाली है जिसके तहत घर जैसे निवेश के खरीद मूल्य को इस तरह समायोजित किया जाता है कि ऐसी परिसंपत्तियों पर मुद्रास्फीति का प्रभाव दिखाई दे।
ऐसी स्थिति में इंडेक्सेशन पर मिलने वाले लाभ को गणना में शामिल न करने पर रियल एस्टेट बाजार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
सीबीडीटी प्रमुख ने इस संदर्भ में कहा कि व्यावहारिक तौर पर नई योजना अधिकांश मामलों में लाभकारी साबित होगी। उन्होंने कहा कि विभिन्न क्षेत्र एवं करदाता पूंजीगत लाभ व्यवस्था को ‘सरल’ बनाने की मांग करते रहे हैं।
अग्रवाल ने कहा कि इस बजट उपाय का उद्देश्य प्रक्रिया को सरल बनाना है क्योंकि कोई भी ‘जटिल संरचना अपने साथ विवाद भी लाती है।’
उन्होंने कहा, ‘‘रियल एस्टेट क्षेत्र में बीते 10 वर्षों में संपत्ति की कीमतें या मुनाफा काफी हद तक बढ़ा है। अब पिछले 10 साल में नई व्यवस्था के साथ अपने इंडेक्सेशन की तुलना करें। मसलन, आपने 2014 में एक संपत्ति खरीदी है और आप इसे 2024-25 में बेच रहे हैं। इस पर इंडेक्सेशन का लाभ केवल 1.5 गुना होगा।’’
इसी के साथ उन्होंने कहा, ‘‘हमने (सीबीडीटी और आयकर विभाग) कुछ गणनाएं की हैं और यह पाया है कि यदि 10 वर्षों में संपत्ति की दर तीन गुना बढ़ी है तो नई व्यवस्था फायदेमंद है।’’
सीबीडीटी प्रमुख ने कहा, ‘‘वर्ष 2001 को आधार मानें तो 20-25 वर्षों में संपत्ति की कीमतें बहुत अधिक बढ़ गई हैं। पिछले 23 वर्षों में यदि संपत्ति की दर सात गुना या साढ़े सात गुना बढ़ गई है तो फिर नए कर प्रावधान ही फायदेमंद हैं। अगर आप गणित को छोड़ दें तो वास्तविक बाजार में आने पर नई कर व्यवस्था ही बेहतर दिखती है।’’
अग्रवाल ने कहा कि प्रभावी रूप से नई व्यवस्था में कर की बाध्यता कम है। उन्होंने कहा, ‘‘हम लंबे समय से इंडेक्सेशन व्यवस्था रहने से इसके अभ्यस्त हो गए हैं और यह हमारी मानसिकता का हिस्सा बन चुका है। लेकिन हम वास्तव में इसका विश्लेषण करना शुरू करें तो असली बाजार की गतिशीलता से यह योजना बेहतर है।’’
उन्होंने कहा कि पुरानी संपत्तियों के मामले में 2001 के उचित बाजार मूल्य के इंडेक्सेशन के हिसाब से ‘ग्रैंडफादरिंग’ प्रावधान लागू होगा। बजट ने 2001 से पहले खरीदी गई या विरासत में मिली संपत्तियों पर करदाताओं के लिए इंडेक्सेशन लाभ को बरकरार रखा है।
प्रतिभूति बाजार में वायदा एवं विकल्प (एफ एंड ओ) सौदों पर लगने वाले प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) को एक अक्टूबर से बढ़ाने की बजट घोषणा के बारे में पूछे जाने पर अग्रवाल ने कहा कि इस खंड में लेनदेन बहुत तेजी से बढ़ रहा था।
उन्होंने कहा, ‘‘हर कोई इसमें शिरकत कर रहा था। लेकिन इससे अधिक जोखिम जुड़े हुए हैं। इसके साथ यह भी तथ्य है कि इतनी अधिक भागीदारी होने पर क्या हम वास्तव में इससे कुछ राजस्व प्राप्त कर सकते हैं? दूसरा सवाल यह है कि क्या हमें इसे बढ़ावा देना चाहिए।’’
भाषा प्रेम प्रेम