हमारे बच्चों को दबाती व कुचलती है देश की शिक्षा प्रणाली: राहुल गांधी
सुरभि
- 17 Jun 2026, 11:30 PM
- Updated: 11:30 PM
(फोटो के साथ)
कोटा, 17 जून (भाषा) कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बुधवार को देश की शिक्षा प्रणाली की प्रासंगकिता पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह हमारे बच्चों को दबाती और कुचलती है जो देश के लिए सही नहीं है। उन्होंने कहा कि देश की शिक्षा प्रणाली चयन (सेलेक्शन) के बजाय खारिज (रिजेक्शन) करने की प्रणाली है जो छात्रों और मध्यम वर्गीय परिवारों पर बहुत ज्यादा आर्थिक बोझ डालती है।
गांधी ने 'कोचिंग हब' के रूप में विख्यात कोटा शहर में छात्रों के साथ संवाद कार्यक्रम 'छात्रों की गूंज' में देश की शिक्षा प्रणाली को बदलने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा, ''हिंदुस्तान की शिक्षा प्रणाली अपने बच्चों को 'प्रेशराइज' (दबाव में) करता है। यह उन्हें 'स्ट्रेस' (तनाव) देता है। यह बच्चों को दबाता और कुचलता है, जो देश के भविष्य के लिए बिल्कुल सही नहीं है।''
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा, ''मैं चाहता हूं कि हम सब मिलकर इसके खिलाफ लड़ाई लड़ें, ताकि आगे से किसी भी बच्चे को 'आत्मघाती' कदम न उठाना पड़े।'' उन्होंने कहा, ''भारत की शिक्षा प्रणाली शोषण (एक्सटोर्शन) मशीन है। ये आपसे पैसे लेने का 'सिस्टम' है। ये सिर्फ शिक्षा देने का 'सिस्टम' नहीं है। ये परीक्षा के आधार पर आपसे लाखों करोड़ रुपये छीनने का 'सिस्टम' है।'
इससे पहले राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों व युवाओं के साथ उनके इस संवाद का मकसद राजनीतिक नहीं है। उन्होंने कहा, ''यह कोई राजनीतिक बैठक नहीं है। इसमें भारत की शिक्षा प्रणाली पर चर्चा होगी कि इसमें क्या कमियां हैं और क्या सुधार करने की जरूरत है।''
उन्होंने बड़ी संख्या में मौजूद छात्र-छात्राओं व युवाओं से कहा, ''यह बैठक (कोटा महारैली) आपके बारे में है, उन युवाओं के बारे में है जो अपना भविष्य बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यह शाम आपके बारे में है, उन चुनौतियों के बारे में है जिनका आप हर दिन सामना कर रहे हैं।"
उन्होंने प्रश्न पत्र लीक और बेरोजगारी जैसे विभिन्न मुद्दों पर छात्रों से बातचीत की।
उन्होंने विभिन्न प्रतियोगी परीक्षा की तैयार कर रहे पांच छात्रों को मंच पर बुलाया और उनसे बात की। उन्होंने एक छात्रा व उसके अभिभावकों से भी मंच पर बात की।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा, ''हम अभी आज राजनीतिक बात नहीं कर रहे हैं। मैं हिंदुस्तान के भविष्य की बात कर रहा हूं, आपके भविष्य की बात कर रहा हूं, देश के भविष्य की बात कर रहा हूं। हमें इस (शिक्षा) प्रणाली को बदलना होगा और इस प्रणाली को ठीक करना होगा।''
उन्होंने कहा कि हम ऐसी शिक्षा प्रणाली चाहते हैं जो हर भारतीय को बड़ा सपना देखने का मौका दे व उसे पूरा करे। सबसे बड़ी बात आपका यह सपना न्यूनतम लागत पर, बिना आपकी जेब से लाखों करोड़ रुपये छीने करना चाहिए।
उन्होंने कहा, ''देश की शिक्षा प्रणाली हिंदुस्तान के सबसे गरीब मध्यम वर्ग के लोगों से एक परीक्षा के लिए उतना पैसा छीनता है जितना शिक्षा मंत्रालय का बजट है और पांच बड़ी परीक्षा के लिए उतना पैसा छीनता है जितने पांच बड़े मंत्रालयों को बजट मिलता है। ये शर्मनाक है। हमें इसे बदलना होगा।''
उन्होंने दावा किया कि यह प्रणाली छात्रों को मुख्य रूप से इंजीनियरिंग, मेडिकल और सिविल सेवा जैसे कुछ ही करियर रास्तों की ओर ले जाती है जबकि अन्य विकल्पों को लेकर हतोत्साहित करती है। उन्होंने आरोप लगाया, "भारत अपने बच्चों से केवल पांच चीजें करने के लिए क्यों कह रहा है? इसका जवाब पैसा है क्योंकि यह सिस्टम इन पांच रास्तों से पैसा कमाता है।"
राहुल गांधी ने एक प्रस्तुति के जरिए राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट), संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी), कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी), रेलवे भर्ती बोर्ड (आरआरबी), संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई) के पांच रास्तों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि लाखों छात्र स्कूली शिक्षा, कोचिंग संस्थानों, यूनिफॉर्म और हॉस्टल सुविधाओं पर बड़ी रकम खर्च करने को मजबूर हैं जबकि प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता की कोई गारंटी नहीं होती।
उन्होंने उक्त प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि लाखों उम्मीदवार बहुत कम 'सीटों' के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं। उन्होंने कहा, 'सिर्फ़ नीट के लिए ही लगभग 22 लाख छात्र परीक्षा देते हैं, लेकिन एक लाख से भी कम चुने जाते हैं। यह बहुत विकट स्थिति है।''
उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा की अर्थव्यवस्था हर साल परिवारों से बड़ी रकम वसूलती है। उन्होंने दावा किया, "छात्र और उनके परिवार मिलकर सिर्फ एक परीक्षा के लिए सरकार के पूरे शिक्षा बजट के बराबर रकम खर्च करते हैं।" उन्होंने कहा कि नीट में 22 लाख छात्र शामिल होते हैं और वे कुल मिलाकर 1.32 लाख करोड़ रुपये खर्च करते हैं, जो शिक्षा मंत्रालय के बजट आवंटन के बराबर है।''
उन्होंने दावा किया, "पांच सबसे बड़ी परीक्षाओं को आपके सपनों के तौर पर देखा जाता है -- एसएससी, यूपीएससी, आरआरबी, जेईई और नीट। इन पांच परीक्षाओं पर परिवार मिलकर लगभग 3.5 लाख करोड़ रुपये खर्च करते हैं। यह रकम शिक्षा, स्वास्थ्य, श्रम, विज्ञान और महिला एवं बाल विकास जैसे मंत्रालयों के लिए सरकार के बजट के बराबर है।"
उन्होंने कहा, "इसके बाद, छात्रों से कहा जाता है कि दरवाजे बंद हो गए हैं और वे आईआईटी (भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान) या नीट में जगह नहीं बना पाए। यही भारत की शिक्षा प्रणाली की सच्चाई है।"
गांधी ने कहा कि इतने निवेश के बावजूद, बहुत कम छात्रों को ही टिकाउ नौकरी मिलती है जबकि बाकी सारे अनिश्चितता का सामना करते हैं।
उन्होंने कहा, "हर हजार छात्रों में से कुछ ही को वेतनभोगी के रूप में नौकरी मिलती है। बाकी संघर्ष करते रह जाते हैं।" उन्होंने कहा, "भारत में ऐसी कोई चीज नहीं है जो किसी बच्चे को सपने देखने से रोके, सिवाय खुद प्रणाली (सिस्टम) के।"
कांग्रेस नेता ने युवाओं के लिए अवसर बढ़ाने और ज्यादा दबाव वाली परीक्षाओं पर निर्भरता कम करने के लिए संरचनात्मक सुधारों की मांग की।
कांग्रेस नेता ने कहा कि यह कार्यक्रम इस आंदोलन की शुरुआत है। उन्होंने युवाओं से इससे जुड़ने व अपने सुझाव देने की अपील की कि हम इस प्रणाली को कैसे बदलें।
गांधी ने दावा किया कि हर 100 इंजीनियरों में से लगभग 80 बेरोजगार हैं। कार्यक्रम के दौरान राहुल ने विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही तीन लड़कियों और दो लड़कों से मंच पर बातचीत की। राहुल ने उनके सपनों, तैयारी, उस पर होने वाले खर्च और उनके चुने जाने की संभावनाओं के बारे में बात की। उन्होंने यूपीएससी की तैयारी कर रही छात्रा व उसके माता-पिता से भी बात की।
कार्यक्रम में नीट, जेइई व अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे बड़ी संख्या में छात्र शामिल हुए।
उल्लेखनीय है कि कोटा देश का प्रमुख 'कोचिंग हब' है जहां लगभग 1.2 लाख छात्र विभिन्न कोचिंग संस्थानों में तैयारी कर रहे हैं।
नेता प्रतिपक्ष की पार्टी कांग्रेस की एक विज्ञप्ति के अनुसार वे देश के छात्रों की परेशानियों को सामने लाने, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ जवाबदेही की मांग करने और युवा भारतीयों के लिए बेहतर भविष्य बनाने पर संवाद शुरू करने के लिए राष्ट्रीय शिक्षा अभियान की अगुवाई करेंगे। इसकी शुरुआत कोटा से हुई। राहुल का अब इलाहाबाद, पटना और दिल्ली में भी ऐसे कार्यक्रमों को संबोधित करने का कार्यक्रम है।
हालांकि कोटा में उनके कार्यक्रम से पहले राजनीति गरमा गई क्योंकि कांग्रेस नेताओं ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर छात्रों को इस कार्यक्रम में भाग लेने से हतोत्साहित करने का आरोप लगाया। वहीं भाजपा ने 21 जून को नीट की दुबारा होने वाली परीक्षा का हवाला देते हुए इस कार्यक्रम के समय पर सवाल उठाए।
भाषा पृथ्वी सुरभि
सुरभि
1706 2330 कोटा