नगालैंड-म्यांमा सीमा के आखिरी गांव में भी मोदी-योगी की पहचान : तेमजेन इम्ना अलॉन्ग
सुरभि
- 15 Jun 2026, 11:13 PM
- Updated: 11:13 PM
लखनऊ, 15 जून (भाषा) नगालैंड सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री तेमजेन इम्ना अलॉन्ग ने कहा कि डिजिटल क्रांति ने राज्यों की सीमाएं तोड़ दी हैं।
यहां डी-3 (डिजिटल डेमोक्रेसी डायलॉग) 'त्रिवेणी' के दो दिवसीय आयोजन के समापन समारोह में नगालैंड सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री तेमजेन इम्ना अलॉन्ग ने कहा, ''नगालैंड-म्यांमा सीमा के आखिरी गांव में भी आज लोग मोदी (प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी) और योगी (उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ) को जानते हैं। यह डिजिटल क्रांति से संभव हुआ है।''
उन्होंने बताया कि 2014 के बाद नगालैंड में सबसे ज्यादा सड़कें बनीं और 18 राष्ट्रीय राजमार्ग पर 16 हजार करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं। उन्होंने 'डिजिटल क्रिएटर्स' से सकारात्मक 'कंटेंट' बनाने की अपील की।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार राजधानी के एक होटल में आयोजित तीन दिवसीय 'डिजिटल डेमोक्रेसी डायलॉग-त्रिवेणी' का सोमवार को समापन हुआ। समापन समारोह में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के सुशासन, संस्कृति और समृद्धि मॉडल पर गहन चर्चा हुई। दो सत्रों में 'समृद्धि: महिला एवं युवा' और 'सांस्कृतिक पुनर्जागरण' विषयों पर मंथन किया गया। वक्ताओं ने कहा कि उप्र की भविष्य की समृद्धि महिलाओं और युवाओं की क्षमता पर निर्भर है।
उप्र सरकार के समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने कहा कि लोकतंत्र में जनता अपने नेता चुनती है, लेकिन कानून और समानता भी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि आने वाला समय डिजिटल क्रांति का है और हमें हर नयी चीज सीखनी होगी।
अरुण ने कहा, "कंटेंट क्रिएटर्स ने नयी राह खोली है। योगी आदित्यनाथ बार-बार कहते हैं कि हर नयी नीति पर जनता से प्रतिक्रिया लें, इसलिए हम सोशल मीडिया की भी मदद लेते हैं।''
वरिष्ठ पत्रकार मृणालिनी नानिवडेकर ने कहा कि किसी भी प्रदेश के विकास में महिलाओं और युवाओं की भूमिका अहम है।
उन्होंने कहा, ''25 साल पहले न्यूजरूम में महिलाएं कम थीं, आज स्थिति बदली है। उप्र में महिला वर्क फोर्स और बर्थ रेट बढ़ रहा है। शासन-प्रशासन अब महिलाओं के मुद्दों पर ज्यादा संवेदनशील है।''
उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण जल्द लागू हो सकता है और फेमिनिज्म का अर्थ 'शिव और शक्ति का साथ रहना' है।
पटना यूनिवर्सिटी के प्रो. गुरु प्रकाश पासवान ने कहा कि देश में महिलाओं को अवसर मिल रहे हैं।
उन्होंने कहा, "75 साल में पहली बार आदिवासी परिवार की महिला देश के सर्वोच्च पद पर पहुंची।''
इस्कॉन गवर्निंग बॉडी कमिश्नर गौरांग दास ने कहा कि भगवत गीता जीवन के दर्द को समझने का मूल है। उन्होंने कहा, ''अयोध्या में राम मंदिर बनने के बाद देशभर के मंदिरों में श्रद्धालुओं की संख्या पांच गुना तक बढ़ गई है।'' उन्होंने इंफ्लुएंसर्स से कहा कि वे श्रीराम के संदेश को घर-घर पहुंचाएं और बताएं कि घर को मंदिर कैसे बनाया जा सकता है।
लेखिका शेफाली वैद्य ने कहा कि 2014 से पहले राम मंदिर निर्माण की कल्पना असंभव थी।
वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने कहा कि राम मंदिर की कानूनी लड़ाई 69 साल चली।
जैन ने कहा, ''पहले सच्चाई दब जाती थी, आज सोशल मीडिया के दौर में संभव नहीं है। ज्ञानवापी, मथुरा कृष्ण जन्मभूमि के मामलों में सही जानकारी तुरंत लोगों तक पहुंच रही है।''
भाषा आनन्द सुरभि
सुरभि
1506 2313 लखनऊ