आरएसएस के वरिष्ठ नेता देवदास आप्टे सच बोलने से कभी नहीं हिचकिचाए : मुरली मनोहर जोशी
दिलीप
- 15 Jun 2026, 10:41 PM
- Updated: 10:41 PM
नयी दिल्ली, 15 जून (भाषा) पूर्व केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष रह चुके मुरली मनोहर जोशी ने सोमवार को कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ नेता देवदास आप्टे बापू एक निस्वार्थ और सिद्धांतवादी नेता थे, जिन्होंने अपना जीवन राष्ट्र सेवा में समर्पित कर दिया।
जोशी ने यह टिप्पणी आप्टे के 92वें जन्मदिन पर उनकी जीवनी 'बापू : इंडियाज अनटोल्ट स्टोरी' के विमोचन के अवसर पर की। पत्रकार तुलिका भटनागर की लिखी इस पुस्तक को प्रभात प्रकाशन ने प्रकाशित किया है।
पुस्तक के विमोचन के अवसर पर भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बीएल संतोष और राजनीतिक विश्लेषक आर बालाशंकर मौजूद थे।
कार्यक्रम में जोशी ने आप्टे के साथ पांच-छह दशकों के अपने जुड़ाव को याद किया। उन्होंने कहा कि आप्टे सच बोलने या संगठन के हित में मुश्किल फैसले लेने में कभी नहीं हिचकिचाते थे।
जोशी ने कहा, "हर कोई जानता था कि बापू निस्वार्थ और मोह-माया से दूर थे। उनके मन में किसी के प्रति न तो कोई बुरी भावना थी और न ही कोई खास लगाव। जो कुछ भी सही और सच था, बापू के लिए वही मायने रखता था।"
देवदास आप्टे को प्यार से 'बापू' कहकर पुकारा जाता था। वह राज्यसभा सदस्य, शिक्षाविद, संगठन संचालक और राष्ट्र-निर्माता थे, जो भारत के आधुनिक इतिहास के नौ दशक से अधिक समय के गवाह रहे।
जोशी ने उस दौर को याद किया, जब लालकृष्ण आडवाणी भाजपा के अध्यक्ष और वह पार्टी महासचिव थे। उन्होंने बताया कि दोनों (आडवाणी और जोशी) ने मिलकर 22 लोगों को टिकट देने से मना कर दिया था।
जोशी के मुताबिक, "लोगों ने पूछा, आपने यह क्या किया? आप एक साथ 22 लोगों को टिकट देने से कैसे मना कर सकते हैं, खासकर उन इलाकों में, जहां हमें सबसे ज्यादा सीटें मिलने की उम्मीद है?"
जोशी के अनुसार, "जवाब में हमने कहा, बापू हमारे साथ हैं। बापू जैसे लोग हमारे साथ हैं। चिंता न करें।" उन्होंने बताया कि पार्टी ने इन सभी 22 सीट पर जीत दर्ज की थी।
जोशी ने कहा कि आप्टे ने कभी निजी लाभ के लिए पद नहीं मांगे और वह सेवा एवं अनुशासन के आदर्शों के प्रति समर्पित रहे।
राज्यसभा में आप्टे के कार्यकाल का जिक्र करते हुए जोशी ने कहा कि पूर्व सांसद अपनी सोच-समझकर और अच्छी तरह से विचार करके की गई बातों के लिए जाने जाते थे।
उन्होंने कहा, "बापू ने संसद में जो कुछ भी कहा, वह पढ़ने लायक है। उन्होंने बहुत सोच-समझकर, तथ्यों की जांच-पड़ताल करके और गहराई से विचार करने के बाद संतुलित ढंग से अपनी बात रखी।"
संतोष ने कहा कि यह किताब "सिर्फ एक जीवनी से कहीं ज्यादा" है, जो 92 साल के आरएसएस प्रचारक, भाजपा नेता और राज्यसभा के पूर्व सदस्य के अनुभवों के जरिये भारत की बदलती कहानी की झलक दिखाती है।
आर बालाशंकर ने कहा कि यह किताब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी के साथ आप्टे के गहरे जुड़ाव को दिखाते हुए "भारत का एक अनोखा विवरण" पेश करती है।
भाषा पारुल दिलीप
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