छत्तीसगढ़ में बिजली की दरें 6.23 प्रतिशत बढ़ीं; कांग्रेस ने इसे 'लूट' बताया
सुरभि
- 15 Jun 2026, 10:04 PM
- Updated: 10:04 PM
रायपुर, 15 जून (भाषा) छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग ने सोमवार को राज्य में सभी तरह के उपभोक्ताओं के लिए बिजली की दरों में औसतन 6.23 प्रतिशत की बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी। एक आधिकारिक बयान से यह जानकारी मिली।
बयान के अनुसार, यह बढ़ोतरी एक जुलाई से लागू होगी। साथ ही, महिलाओं के स्वयं-सहायता समूहों, अस्पतालों और आदिवासी इलाकों के लिए कई रियायतें बरकरार रखी गई हैं।
आधिकारिक बयान के मुताबिक, यह बढ़ोतरी राज्य की बिजली वितरण कंपनी द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए मांगी गई 24 प्रतिशत की बढ़ोतरी की तुलना में काफी कम है।
आयोग ने कहा कि संशोधित दरों को मंजूरी वित्तीय वर्ष के लिए अनुमानित राजस्व की जरूरत को पूरा करने के लिए दी गई है।
बयान में कहा गया है कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए वितरण कंपनी ने 8.40 रुपये प्रति यूनिट औसत विद्युत प्रदाय दर का प्रस्ताव प्रस्तुत किया था। विश्लेषण के बाद आयोग ने औसत विद्युत प्रदाय दर 7.13 रुपये प्रति यूनिट स्वीकृत की है।
बयान के अनुसार आयोग ने वर्ष 2026-27 के लिए वर्तमान शुल्क (टैरिफ) के आधार पर औसत बिलिंग दर 6.71 रुपये प्रति यूनिट अनुमानित की है, जो कि औसत लागत दर 7.13 रुपये प्रति यूनिट से 42 पैसे कम है।
बयान के मुताबिक घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली की दरों में 30 से 50 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी की गई है, जिससे राज्य के लगभग 60 लाख उपभोक्ता प्रभावित होंगे। गैर-घरेलू उपभोक्ताओं के लिए दरों में 20 से 40 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी की गई है, जबकि कृषि पंप कनेक्शन के लिए दरों में 40 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी हुई है।
आयोग ने पंजिकृत महिला स्वयं-सहायता समूहों द्वारा संचालित औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए ऊर्जा शुल्क में 10 प्रतिशत की रियायत को जारी रखा है।
आयोग ने कहा कि राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों, बस्तर एवं दक्षिण क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण तथा सरगुजा एवं उत्तर क्षेत्र विकास प्राधिकरण में संचालित अस्पताल, नर्सिंग होम तथा डायग्नोस्टिक सेंटर के लिए प्रचलित विद्युत दरों के ऊर्जा प्रभार में दी जा रही 10 प्रतिशत की छूट को जारी रखा गया है।
वहीं बस्तर और सरगुजा आदिवासी प्राधिकरण क्षेत्रों में स्थित मोबाइल टावरों के लिए ऊर्जा शुल्क पर 25 प्रतिशत की छूट को जारी रखा गया है।
बयान में कहा गया है कि पर्यावरण संरक्षण को प्रोत्साहित करने के लिए इलेक्ट्रिकल व्हीकल चार्जिंग इकाइयों के लिए इलेक्ट्रिकल व्हीकल चार्जिंग के शुल्क को औसत विद्युत लागत के बराबर अर्थात 7.13 रुपये प्रति यूनिट निर्धारित किया गया है।
राज्य में गैर-सब्सिडी वाले कृषि पंप कनेक्शनों को ऊर्जा प्रभार में दी जा रही छूट को 30 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत किया गया है।
बयान में कहा गया है कि किसानों को खेती के लिए लगे पंपों के पास लाइट और पंखे चलाने के लिए 100 वॉट तक बिजली इस्तेमाल करने की इजाजत मिलती रहेगी। साथ ही, एलवी-5 श्रेणी के अंतर्गत आने वाले पोहा एवं मुरमुरा मिल को ऊर्जा प्रभार में 10 प्रतिशत की छूट को जारी रखा गया है।
अग्रिम भुगतान किए जाने पर दिए जाने वाले 1.25 प्रतिशत छूट को घटाकर 0.75 प्रतिशत किया गया है। यह सुविधा वितरण कंपनी से 100 प्रतिशत विद्युत प्राप्त करने वाले उपभोक्ताओं को ही प्रदान की जाएगी। वहीं विलंबित भुगतान अधिभार को 1.5 प्रतिशत प्रति माह से बदलकर 0.04 प्रतिशत प्रति दिन कर दिया गया है।
छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के प्रबंध निदेशक भीमसिंह कंवर ने कहा है कि छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग ने वर्ष 2026-27 के लिए विद्युत दरों की घोषणा करते हुए उपभोक्ताओं को राहत देने वाले कई प्रावधानों को यथावत बनाए रखा है।
एक बयान में उन्होंने कहा कि प्रदेश में मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत जन अभियान के तहत 400 यूनिट तक खपत करने वाले निम्न आय वर्गीय उपभोक्ताओं को 200 यूनिट की खपत पर आधा बिजली बिल का लाभ दिया जा रहा है, इस श्रेणी में औसतन 15 पैसे से 20 पैसे की बढ़ोतरी होगी।
कंवर ने कहा कि कृषि पंपों में शासन द्वारा सब्सिडी दी जा रही है। उन्होंने दावा किया कि विद्युत दरों में वृद्धि के बावजूद यह दरें झारखंड, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र राज्य की विद्युत दरों से कम हैं।
इस बीच, विपक्षी दल कांग्रेस ने शुल्क बढ़ोतरी की कड़ी आलोचना की और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पर ग्राहकों पर बोझ डालने का आरोप लगाया।
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि भाजपा सरकार ने इस बार घरेलू उपभोक्ताओं के दाम में 30 से 50 पैसे तथा गैर घरेलू में 20 से 40 पैसे की बढ़ोत्तरी की है। भाजपा सरकार ने किसानों को भी नहीं बख्शा कृषि के पंप की बिजली में भी 40 पैसे की बढ़ोत्तरी की गयी है। भाजपा की सरकार बनने के बाद लगातार पांचवी बार बिजली के दाम बढ़ाये गये है। कांग्रेस सरकार के इस निर्णय का विरोध करती है।
भाषा संजीव सुरभि
सुरभि
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