बीकानेर पीबीएम अस्पताल में प्रसव के बाद छह महिलाओं की तबीयत बिगड़ी, जांच समिति गठित
बाकोलिया रवि कांत
- 10 Jun 2026, 12:16 AM
- Updated: 12:16 AM
बीकानेर, नौ जून (भाषा) राजस्थान के बीकानेर स्थित प्रिंस विजय सिंह मेमोरियल (पीबीएम) अस्पताल में सीजेरियन प्रसव के बाद छह प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद पूरे मामले की जांच के लिए एक समिति गठित की गई है। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
अधिकारियों के अनुसार, इनमें से कई महिलाओं को गुर्दे संबंधी जटिलताएं हुई हैं, जिसके चलते उन्हें आईसीयू में भर्ती कर लगातार निगरानी में रखा गया है।
राज्य के स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने कहा कि बीकानेर और कोटा की घटनाएं अलग-अलग हैं और उन्हें आपस में जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि बीकानेर मामला कोटा की घटना से पूरी तरह अलग है, जहां हाल ही में पांच महिलाओं की मौत हुई थी।
उन्होंने बताया कि बीकानेर में सभी महिलाएं अलग-अलग समय पर अस्पताल पहुंची थीं और उन्हें अलग-अलग परिस्थितियों में उपचार दिया गया था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में अब तक किसी की मृत्यु नहीं हुई है।
मंत्री ने कहा, ''स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी गई है। जोधपुर से विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम बीकानेर भेजी गई है, जो पूरे मामले की विस्तृत जांच करेगी।''
उन्होंने बताया कि सभी मामलों में सीजेरियन प्रसव नहीं हुआ था, कुछ मामलों में सामान्य प्रसव भी हुआ था।
खींवसर ने कहा, ''हम यह जांच कर रहे हैं कि इन मामलों में किडनी संबंधी जटिलताएं क्यों हुईं। प्रारंभिक रिपोर्ट शाम तक आने की उम्मीद है।''
उन्होंने यह भी बताया कि अस्पताल में उपयोग की गई दवाओं और अन्य चिकित्सा सामग्रियों के नमूने जांच के लिए एकत्र किए जा रहे हैं, ताकि जटिलताओं के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके।
जांच समिति में शामिल सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुरेंद्र वर्मा ने बताया कि कुछ महिलाओं में प्रसव के बाद स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं देखी गई हैं और वे विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में उपचाराधीन हैं।
उन्होंने कहा, ''मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच समिति गठित की गई है। रिपोर्ट आने के बाद ही वास्तविक कारण स्पष्ट हो सकेगा। हमारी प्राथमिकता मरीजों का समुचित उपचार और उनका स्वास्थ्य लाभ सुनिश्चित करना है।''
अस्पताल अधीक्षक डॉ. बी.सी. घीया ने बताया कि मरीजों की लगातार निगरानी की जा रही है और गुर्दा रोग, स्त्री रोग एवं मेडिसिन विभाग की टीमें संयुक्त रूप से उपचार कर रही हैं। कुछ मरीजों को डायलिसिस की आवश्यकता भी पड़ी है, जो नियमित रूप से किया जा रहा है।
गुर्दा रोग विभाग के प्रोफेसर डॉ. जितेंद्र फलोदिया ने बताया कि सभी मरीज विशेषज्ञों की देखरेख में हैं और उन्हें आवश्यक चिकित्सा सहायता दी जा रही है।
इस बीच, मरीजों के परिजनों ने चिंता जताते हुए आरोप लगाया कि प्रसव के बाद शुरुआत में महिलाएं सामान्य थीं, लेकिन बाद में उनकी स्थिति अचानक बिगड़ गई।
एक परिजन लेखराम ने कहा, ''प्रसव के बाद वे सामान्य थीं, लेकिन बाद में मूत्र संबंधी और अन्य समस्याएं शुरू हो गईं। हम चाहते हैं कि निष्पक्ष जांच हो ताकि वास्तविक कारण सामने आए और ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।''
एक अन्य परिजन जुबैदा ने भी अचानक तबीयत बिगड़ने पर चिंता जताई।
वहीं, राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह घटना स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर विफलता को दर्शाती है।
उन्होंने कहा, ''यह कोई साधारण घटना नहीं है, बल्कि राज्य की स्वास्थ्य नीतियों, प्रशासनिक लापरवाही और जवाबदेही की कमी का परिणाम है।''
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार करने के बजाय विफलताओं को छिपाने का प्रयास कर रही है।
अधिकारियों ने बताया कि जांच जारी है और विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद ही वास्तविक कारणों की पुष्टि हो सकेगी। फिलहाल सभी मरीज आईसीयू और विशेष वार्डों में उपचाराधीन हैं।
भाषा
बाकोलिया रवि कांत
1006 0016 बीकानेर