दिल्ली अग्निकांड: घटना की सूचना देने में आधे घंटे की हुई देरी
दिलीप
- 08 Jun 2026, 10:13 PM
- Updated: 10:13 PM
नयी दिल्ली, आठ जून (भाषा) दिल्ली में मालवीय नगर होटल अग्निकांड की जांच में कई गंभीर लापरवाहियां सामने आई हैं, जिनमें तेल से भरा फ्रायर जलता हुआ छोड़ देना और आग फैलने के बावजूद रसोइया द्वारा बिना किसी को सूचना दिए वहां से चले जाना शामिल है।
अधिकारियों का मानना है कि ये लापरवाही हादसे की वजह बनी घटनाओं की अहम कड़ियों के तौर पर उभरी हैं। इस हादसे में 22 लोगों की मौत हो गई है।
जांच में यह भी पता चला है कि आग लगने के बाद अधिकारियों को सूचना दिए जाने में करीब 30 मिनट की देरी हुई, जिससे आग पर समय रहते काबू नहीं पाया जा सका और वह तेजी से फैलती चली गई।
अधिकारियों के अनुसार, रसोई में हुई एक सामान्य लापरवाही समय पर कार्रवाई न होने के कारण भीषण त्रासदी में बदल गई।
पुलिस के अनुसार, तीन जून को मालवीय नगर के हौज रानी इलाके में स्थित 'फ्लोरिश स्टेस बीएंडबी' में आग तब लगी, जब रसोइये ने अपने लिए चाय बनाते समय गलती से तेल के फ्रायर को चालू छोड़ दिया था।
जैसे ही फ्रायर में मौजूद तेल का तापमान बहुत अधिक हुआ, उसमें अचानक आग लग गई और आग ने तेजी से फैलते हुए पूरे भवन को अपनी चपेट में ले ली। परिसर के भीतर रखे कार्टन जैसी अत्यधिक ज्वलनशील सामग्रियों के कारण आग और तेजी से भड़की।
इस बीच, मामले की जांच तेज होने के साथ ही होटल मालिक लवकेश बजाज के करीबी सहयोगी और अकाउंटेंट जय मिश्रा (34) ने सोमवार को दिल्ली की एक अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया, जहां से उसे दो दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया।
जांचकर्ताओं का मानना है कि मिश्रा इस प्रतिष्ठान के दैनिक प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था। पुलिस होटल के संचालन, वित्त, लाइसेंसिंग और सुरक्षा नियमों के अनुपालन में उसकी संलिप्तता की जांच कर रही है।
पुलिस इस बात की वैज्ञानिक जांच के लिए आईआईटी-दिल्ली से तकनीकी सहायता लेने की भी तैयारी कर रही है कि इमारत में आग इतनी तेजी से कैसे फैली।
अधिकारियों ने बताया कि संस्थान से इमारत का संरचनात्मक और अग्नि-प्रसार संबंधी अध्ययन करने के लिए कहा जा सकता है, जिसमें क्षतिग्रस्त परिसर की 'थ्रीडी मैपिंग' भी शामिल है, ताकि घटनाओं के क्रम को फिर से समझने और उन कारकों की पहचान करने में मदद मिल सके, जिनकी वजह से लोग अंदर ही फंस गए।
जांचकर्ताओं के मुताबिक, पिछले बुधवार को जब आग लगी, उस समय इमारत में स्टाफ के तीन सदस्य मौजूद थे, जिनमें रसोइया केशव नेगी, शीर्ष मंजिल पर सो रहा एक हेल्पर और प्रबंधक रूपेश उर्फ राकेश।
पूछताछ के दौरान नेगी ने कथित तौर पर पुलिस को बताया कि उसने तेल से भरा फ्रायर चालू किया और फिर अपने लिए चाय बनाने लगा। चाय पीते समय वह भूल गया कि फ्रायर अब भी चल रहा है। अत्यधिक गर्म होने के बाद इसमें से आग की लपटें उठने लगीं, जो छत तक फैल गईं और फिर पास में रखी ज्वलनशील सामग्री को अपनी चपेट में ले लिया।
पुलिस ने बताया कि नेगी ने शुरुआत में आग बुझाने का प्रयास किया था, लेकिन जब आग नियंत्रण से बाहर हो गई, तो वह वहां से भाग गया।
जांचकर्ताओं का आरोप है कि पर्याप्त समय होने के बावजूद वह मेहमानों को चेतावनी देने, पड़ोसियों को सूचित करने या आपातकालीन सेवाओं को बुलाने में विफल रहा।
एक सूत्र ने बताया, "आग के शुरुआती संकेतों और पुलिस को की गई पहली कॉल के बीच लगभग आधे घंटे का अंतर था। इस अवधि की बारीकी से जांच की जा रही है क्योंकि समय पर लोगों बाहर निकालने और अधिकारियों को सतर्क करने से घटना में हुए इतने नुकसान को कम किया जा सकता था।"
शीर्ष मंजिल पर सो रहा हेल्पर छत से कूदकर बच निकला, जबकि प्रबंधक रूपेश कथित तौर पर भूतल पर बने रिसेप्शन क्षेत्र से भाग गया। पुलिस अब भी उसकी तलाश कर रही है।
जांचकर्ताओं का मानना है कि कर्मचारियों द्वारा तुरंत सचेत न करने के कारण मृतकों की संख्या इतनी अधिक हुई है। शनिवार को इलाज के दौरान एक नाइजीरियाई नागरिक के दम तोड़ने के साथ ही मृतकों की संख्या बढ़कर 22 हो गई है।
मृतक की पहचान ओकाले के रूप में हुई है, जो गंभीर रूप से झुलस गया था और सफदरजंग अस्पताल में उसका इलाज हो रहा था।
पुलिस ने पुष्टि की है कि बजाज आग लगने के बाद मौके पर पहुंचा था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि होटल में कोई इलेक्ट्रॉनिक गेट सिस्टम नहीं था, जबकि ऐसे दावे किए जा रहे थे।
आग के कारण इमारत के अंदर और बाहर लगे सीसीटीवी कैमरों और उनकी फुटेज के नष्ट हो जाने से जांच जटिल हो गई है।
पुलिस ने बताया कि बजाज के हौज रानी इलाके में तीन होटल हैं, जिनमें से एक का संचालन वह एक कारोबारी साझेदार के साथ मिलकर करता है।
पुलिस के अनुसार, मिश्रा के खिलाफ इससे पहले साल 2024 में होटल में सुरक्षा व्यवस्था न होने के संबंध में भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत मामला दर्ज किया गया था। जांचकर्ताओं को यह भी पता चला है कि होटल से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज उसी के नाम पर थे।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि मिश्रा पिछले लगभग एक दशक से बजाज को जानता है और वित्तीय व अकाउंटिंग के मामलों को संभालने के साथ-साथ बजाज के कई व्यावसायिक उद्यमों के लिए 'फ्रंटमैन' के रूप में काम करता था।
पूछताछ के दौरान बजाज ने कथित तौर पर जांचकर्ताओं को बताया कि उसने होटल का दैनिक संचालन मिश्रा को सौंप रखा था। अधिकारी अब होटल के कामकाज और कथित सुरक्षा लापरवाहियों के लिए जिम्मेदारी तय करने के लिए दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड और मालिकाना हक के कागजातों की जांच कर रहे हैं।
प्रारंभिक निष्कर्षों से संकेत मिलता है कि इमारत भी घटना में हुई इतनी जनहानि के लिए जिम्मेदार हो सकती है। आरोप है कि इस इमारत का निर्माण आवश्यक मंजूरियों के बिना किया गया था। जांचकर्ताओं को संदेह है कि सीढ़ियों, छतों और फर्शों में लकड़ी और प्लास्टिक की सजावटी सामग्रियों के व्यापक उपयोग ने आग की लपटों को और तेजी से फैलाया।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कहीं इमारत का एकमात्र प्रवेश-निकास मार्ग घने धुएं और अत्यधिक गर्मी से भर जाने के कारण मौत का कुआं तो नहीं बन गया, जिससे ऊपरी मंजिलों पर फंसे मेहमानों का बाहर निकलना असंभव हो गया।
आईआईटी-दिल्ली के प्रस्तावित अध्ययन में जलने के पैटर्न, क्षतिग्रस्त सीढ़ियों, बिजली के तार, एलपीजी सिलेंडर, गैस पाइपलाइनों और ढह गए संरचनात्मक हिस्सों का विश्लेषण किए जाने की उम्मीद है, ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि आग इमारत में कैसे फैली और क्या वास्तुशिल्प की कमियों ने इस आपदा को और गंभीर बना दिया।
भाषा नोमान दिलीप
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