कंबोडिया से की गई साइबर धोखाधड़ी में 5,300 भारतीय सिम कार्ड का इस्तेमाल किया गया: ईडी
संतोष
- 08 Jun 2026, 09:49 PM
- Updated: 09:49 PM
नयी दिल्ली, आठ जून (भाषा) प्रवर्तन निदेशालय ने देश में कथित तौर पर 5,300 सिम कार्ड की खरीद से जुड़े एक मामले की जांच शुरू की है, जिनका इस्तेमाल कंबोडिया में एक मलेशियाई नागरिक के नेतृत्व वाले गिरोह द्वारा पूरे भारत में साइबर धोखाधड़ी को अंजाम देने और लोगों से करोड़ों रुपये ठगने के लिए किया गया था।
केंद्रीय एजेंसी ने पांच जून को पंजाब के लुधियाना के अलावा राजस्थान के किशनगढ़ (अजमेर), नागौर और जोधपुर में सात परिसर की तलाशी ली थी, जिसके आधार पर 30 घरेलू बैंक खातों की पहचान हुई, जो कथित तौर पर इस धोखाधड़ी नेटवर्क का हिस्सा हैं।
ईडी ने सोमवार को जारी एक बयान में कहा कि धनशोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत दर्ज किया गया यह मामला जोधपुर पुलिस (साइबर अपराध इकाई) की उस प्राथमिकी से जुड़ा है जिसमें कुछ पीओएस (प्वाइंट ऑफ सेल्स) विक्रेताओं के खिलाफ भारतीय सिम को 'धोखाधड़ी से' सक्रिय करने और उन्हें एक मलेशियाई नागरिक को सौंपने का आरोप लगाया गया था, जो कंबोडिया से उनका संचालन करता था।
ईडी ने बताया कि कंबोडिया में स्थित ''ठगी गिरोहों'' से जुड़े कई साइबर अपराध के मामले सामने आए हैं, जिनमें 'डिजिटल अरेस्ट' भी शामिल हैं। इन मामलों में भारतीयों को साइबर अपराध के जरिए फंसाया गया है।
केंद्रीय एजेंसी ने बताया कि उसने 2.3 लाख नंबरों (सिम कार्ड) का विश्लेषण किया और पाया कि उनमें से लगभग 36,000 कंबोडिया में सक्रिय थे, जिनमें से लगभग 5,300 का इस्तेमाल व्हाट्सऐप कॉल करके पूरे भारत में सैकड़ों करोड़ रुपये के साइबर धोखाधड़ी करने में किया गया।
एजेंसी ने बताया कि तलाशी के दौरान सामने आया कि राहुल कुमार झा, मोहम्मद शरीफ और संदीप भट्ट ने प्रकाश भील, रामअवतार राठी, हरीश मालाकार और हेमंत पनवार नामक अन्य सिम विक्रेताओं के साथ मिलकर मलेशियाई नागरिक को सैकड़ों सिम कार्ड की आपूर्ति की।
ईडी ने बताया कि सिम विक्रेताओं के पास एयरटेल, जियो और वीआई (वोडाफोन इंडिया) जैसे दूरसंचार ऑपरेटरों की पीओएस आईडी थी।
एजेंसी ने बताया, ''आरोपी(विक्रेता) सिम कार्ड पोर्ट करने या नए सिम जारी करने के बहाने कम पढ़े-लिखे और भोले-भाले लोगों को निशाना बनाते थे।''
ईडी ने आरोप लगाया, ''हालांकि, उक्त सिम को सक्रिय करते समय, उन्होंने अतिरिक्त रूप से अन्य सिम भी सक्रिय कर दिए, जिन्हें बाद में राहुल कुमार झा और उनके सहयोगियों के जरिये कमीशन के बदले में मलेशियाई नागरिक को आपूर्ति की गई।''
भाषा धीरज संतोष
संतोष
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