कुत्तों को हटाने के न्यायालय के आदेश पर पशु अधिकार समूहों ने उठाए सवाल, 13 जून को विरोध प्रदर्शन
सुरेश
- 08 Jun 2026, 09:11 PM
- Updated: 09:11 PM
नयी दिल्ली, आठ जून (भाषा) पशु अधिकार कार्यकर्ताओं ने सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने के संबंध में हाल ही में उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए निर्देशों पर सोमवार को चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इससे जानवरों के प्रति क्रूरता के खिलाफ सुरक्षा उपाय कमजोर हो सकते हैं।
'कॉन्फ्रेंस ऑफ ह्यूमन राइटस (इंडिया)' द्वारा यहां आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए पशु अधिकार कार्यकर्ताओं ने कहा कि कुत्तों को उनके प्राकृतिक पर्यावासों से हटाने के बजाय नसबंदी और टीकाकरण कार्यक्रमों को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए।
उन्होंने दलील दी कि वर्तमान स्थिति अधिकारियों द्वारा वर्षों से पशु जन्म नियंत्रण और रेबीज-रोधी उपायों के अपर्याप्त कार्यान्वयन का परिणाम है।
पशु अधिकार कार्यकर्ताओं ने अदालत के निर्देशों और उनके क्रियान्वयन को लेकर अपनी चिंता व्यक्त करने के लिए 13 जून को जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन की घोषणा भी की।
अधिवक्ता ननिता शर्मा ने इस कार्यक्रम में कहा कि आदेश के कुछ प्रावधान निर्देशों को लागू करने वाले अधिकारियों को संरक्षण प्रदान करते हैं, लेकिन यह निर्धारित करने के लिए कोई स्पष्ट तंत्र निर्दिष्ट नहीं करते कि कार्रवाई "सद्भावना" से की गई थी या "दुर्भावनापूर्ण इरादे" से।
उन्होंने सवाल उठाया कि कार्यान्वयन प्रक्रिया की निगरानी कौन करेगा और यह सुनिश्चित कौन करेगा कि स्थानांतरित किए गए जानवरों के साथ क्रूरता न हो।
शर्मा ने कहा कि इस संकट को "कुत्तों का आतंक" नहीं, बल्कि अपर्याप्त नसबंदी और टीकाकरण प्रयासों सहित प्रशासनिक विफलताओं का परिणाम माना जाना चाहिए। उन्होंने जानवरों के प्रति करुणा की आवश्यकता पर जोर दिया।
दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफेसर अणु पांडे ने कहा कि शैक्षणिक संस्थान लंबे समय से आवारा कुत्तों के साथ सह-अस्तित्व में रहे हैं और छात्र अक्सर उन्हें खिलाने, टीका लगाने और नसबंदी कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने दावा किया कि दिल्ली भर के विश्वविद्यालयों और कॉलेज परिसरों ने दशकों से मानवीय गतिविधियों और आवारा कुत्तों की मौजूदगी के बीच संतुलन बनाए रखा है।
पांडे ने रेबीज के बारे में व्यापक रूप से फैली गलत सूचनाओं पर भी प्रकाश डाला और कहा कि कुत्ते के काटने की घटनाओं के बाद अक्सर लोगों का डर बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि आवारा कुत्तों से संबंधित चिंताओं को दूर करने के लिए जानवरों को विस्थापित करने के बजाय टीकाकरण और जागरूकता आवश्यक है।
कार्यकर्ताओं ने अधिकारियों से आग्रह किया कि वे पशु जनसंख्या प्रबंधन के वैज्ञानिक उपायों को प्राथमिकता दें और यह सुनिश्चित करें कि अदालत के आदेश से उत्पन्न होने वाले किसी भी नीतिगत निर्णय में पशु कल्याण को केंद्र में रखा जाए।
भाषा
राखी सुरेश
सुरेश
0806 2111 दिल्ली